आरा, 25 जून (भाषा) बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी मुठभेड़ मामले की न्यायिक जांच कर रहे पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) विनोद कुमार सिन्हा ने बृहस्पतिवार को मृतक के पैतृक गांव पहुंचकर उसके परिजनों से मुलाकात की और घटना के संबंध में उनका पक्ष सुना।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सिन्हा, भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया और पुलिस अधीक्षक श्रीराज के साथ बिलौती गांव पहुंचे, जहां उन्होंने भरत तिवारी के परिजनों से बातचीत की।
भोजपुर जिले में पिछले सप्ताह पुलिस मुठभेड़ में भारत तिवारी की मौत के बाद इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस द्वारा बल प्रयोग पर सवाल उठाए गए और स्वतंत्र जांच की मांग की गई। मामले को लेकर बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
पुलिस के अनुसार, भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव निवासी भरत तिवारी 17 जून को उसे गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर अवैध हथियार से गोलीबारी करने लगा। पुलिस के अनुसार, पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तिवारी घायल हो गया और बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
हालांकि, तिवारी के परिजनों का आरोप है कि तिवारी ने गोली चलाने से पहले आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी फेंक दिया था। उनका दावा है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो से प्रतीत होता है कि पुलिस की गोलीबारी के समय वह निहत्था था। हालांकि, ‘पीटीआई-भाषा’ उन वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।
तिवारी के भाई ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, ‘न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) विनोद कुमार सिन्हा ने घटना के संबंध में हमारी बात सुनी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और विश्वास है कि हमें न्याय मिलेगा। हमलोग, भाई की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं।’
उल्लेखनीय है कि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बुधवार को बिलौती गांव पहुंचकर मृतक के परिजनों से मुलाकात की थी। इसके बाद गांव में आयोजित महापंचायत को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि मामले में केवल भोजपुर जिले के अधिकारियों की ही नहीं, बल्कि ‘पटना में बैठे शीर्ष अधिकारियों’ की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
किशोर ने चेतावनी दी थी कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि न्यायिक जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बजाय कार्यरत न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए, जांच तीन महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए और इसकी परिधि भोजपुर जिले से आगे बढ़ाकर उच्च स्तर तक जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
किशोर ने कहा था, ‘मृतक के परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें न मुआवजा चाहिए और न ही अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी। उन्हें केवल न्याय चाहिए और मैं भी उनकी इस मांग का समर्थन करता हूं।’
भाषा कैलाश मनीषा अमित
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