कच्छ (गुजरात), 17 जून (भाषा) गुजरात सरकार ने बुधवार को कहा कि विदेश मंत्रालय और भारतीय राजनयिक मिशनों के प्रयासों से, उसने राज्य के एक प्रोफेसर की वापसी में मदद की है, जो इबोला से प्रभावित डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में एक महीने से फंसे हुए थे।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गुजरात सरकार की त्वरित कार्रवाई की वजह से भुज (कच्छ) के रहने वाले शिक्षाविद डॉ. अमीन सामा सुरक्षित घर लौट पाए हैं। वह इबोला से जुड़ी चिंताओं के कारण सीमा पर लगी पाबंदियों के चलते डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो के गोमा में लगभग एक महीने से फंसे हुए थे।
भुज के श्री आर. आर. लालन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और भारतीय नागरिक डॉ. सामा, 15 मई 2026 को अपने बचपन के दोस्त से मिलने के लिए रवांडा के किगाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट से होते हुए कांगो गए थे।
लेकिन, ठीक दो दिन बाद, रवांडा सरकार ने इबोला फैलने की आशंका के चलते कांगो से लगी अपनी सीमा बंद कर दी, जिससे वह किगाली वापस नहीं लौट पाए।
बयान में कहा गया, ‘‘अचानक सीमा बंद होने से डॉ. सामा के यात्रा कार्यक्रम में रुकावट आई और वह 31 मई को भारत लौटने वाली अपनी तय उड़ान नहीं पकड़ पाए। घर लौटने का कोई तुरंत रास्ता न होने के कारण वह गोमा में फंस गए।’’
इसके बाद डॉ. सामा ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के कार्यालय से संपर्क किया। इसके बाद गुजरात सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के प्रवासी प्रभाग के अंतर्गत कार्यरत नॉन रेजिडेंट गुजराती फाउंडेशन (एनआरजीएफ) ने मामले को तुरंत अपने संज्ञान में लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
एनआरजीएफ ने विदेश मंत्रालय और संबंधित भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ मिलकर प्रयास किए।
संघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सरकार दुनिया में कहीं भी मुश्किलों का सामना कर रहे गुजरातियों और भारतीय नागरिकों को हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाषा आशीष प्रशांत
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