Bhupesh Bora Joins BJP: पूर्व पीसीसी चीफ ने कार्यकर्ताओं के साथ थामा भाजपा का दामन, मनाते रह गए राहुल गांधी सहित पार्टी के कई दिग्गज, कहा- अब बर्दाश्त नहीं होती बेइज्जती

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Bhupesh Bora Joins BJP: पूर्व पीसीसी चीफ ने कार्यकर्ताओं के साथ थामा भाजपा का दामन, मनाते रह गए राहुल गांधी सहित पार्टी के कई दिग्गज, कहा- अब बर्दाश्त नहीं होती बेइज्जती

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  • Publish Date - February 22, 2026 / 12:48 PM IST,
    Updated On - February 22, 2026 / 01:43 PM IST

Bhupesh Bora Joins BJP: पूर्व पीसीसी चीफ ने कार्यकर्ताओं के साथ थामा भाजपा का दामन, मनाते रह गए राहुल गांधी सहित पार्टी के कई दिग्गज / Image: X

HIGHLIGHTS
  • भूपेन कुमार बोरा भाजपा में शामिल हो गए
  • पार्टी नेतृत्व पर उपेक्षा और हक न देने के गंभीर आरोप लगाए
  • राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने फोन पर बात की थी

गुवाहाटी: Bhupesh Bora Joins BJP कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा रविवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा की असम इकाई के मुख्यालय ‘वाजपेयी भवन’ में आयोजित एक समारोह के दौरान बोरा भाजपा के सदस्य बन गए। उनके साथ ही पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता संजू बोरा भी भाजपा में शामिल हुए। बोरा ने 16 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसे पार्टी आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया था और वरिष्ठ नेता उनके आवास पर पहुंचे थे। राहुल गांधी ने भी उनसे बात की थी। उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए समय मांगा था लेकिन अगले दिन मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा उनके आवास पर गए और घोषणा की कि वह 22 फरवरी को भाजपा में शामिल हो जाएंगे। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मार्च-अप्रैल में चुनाव प्रस्तावित हैं।

भूपेन बोरा भाजपा में शामिल

Bhupesh Bora Joins BJP कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है। बता दें कि बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष थे और पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं।

कांग्रेस पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप

बोरा ने गुवाहाटी में संवाददाताओं से कहा था कि, “मैंने आज सुबह आठ बजे कांग्रेस आलाकमान को अपना इस्तीफा भेज दिया और विस्तार से बताया कि मुझे यह कदम उठाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा। यह कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं है। मैंने पार्टी को 32 साल दिए हैं। मैं 1994 में पार्टी में शामिल हुआ था। यह कदम केवल व्यक्तिगत नहीं है, यह पार्टी के भविष्य की चिंता से प्रेरित है। इसलिए मैंने कांग्रेस आलाकमान को सब कुछ विस्तार से बताया।”

राहुल गांधी भी नहीं मना पाए

वहीं, बोरा के त्यागपत्र की जानकारी मिलते ही कांग्रेस के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह, पार्टी की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने उनसे उनके आवास पर मुलाकात की थी। बताया गया कि बोरा को मनाने के क्रम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी उनसे फोन पर बात की थी, लेकिन वो नहीं मानें।

असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने किया फर्जी दावा

वहीं, असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने संवाददाताओं से कहा था कि मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। उन्होंने कहा, ‘‘भूपेन जी हमारे बहुत ही वरिष्ठ नेता हैं। परिवार के अंदर कभी-कभी मनमुटाव हो जाता है। लेकिन यह हमारा आंतरिक मामला है। भूपेन जी ने असम की जनता के लिए लड़ाई लड़ी है और कांग्रेस में लंबा राजनीतिक जीवन बिताया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने उनसे (इस्तीफा वापस लेने का) आग्रह किया, उनकी राहुल गांधी जी से बात हुई, केसी वेणुगोपाल जी से बात हुई।’’ सिंह ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘हमारी पार्टी एक लोकतांत्रिक पार्टी है। हम दूसरी पार्टियों की तरह नहीं हैं कि ऊपर से डंडा चलता है और सब चुप हो जाते हैं। यदि कोई विषय होता है, तो हम सब आपस में बात करके उसे सुलझाते हैं।’’ उन्होंने यह भी कहा था किराज्य में भूपेन बोरा प्रचार अभियान संभालेंगे।

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भूपेन बोरा ने कांग्रेस क्यों छोड़ी?

बोरा के अनुसार, पिछले साल उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर गौरव गोगोई को कमान सौंपने के बाद से वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पार्टी के भविष्य को लेकर उनकी चिंताओं को आलाकमान ने गंभीरता से नहीं लिया।

असम चुनाव 2026 पर इसका क्या असर होगा?

असम में मार्च-अप्रैल में चुनाव होने हैं। बोरा दो बार के विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। उनके भाजपा में जाने से ऊपरी असम (Upper Assam) में कांग्रेस का आधार कमजोर हो सकता है और भाजपा के 'मिशन 100+' को मजबूती मिलेगी।

क्या भूपेन बोरा के साथ और भी नेता भाजपा में गए हैं?

हाँ, उनके साथ पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता संजू बोरा और कई अन्य समर्थकों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है।

गौरव गोगोई और भूपेन बोरा के बीच क्या विवाद था?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, 2025 में गौरव गोगोई को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही राज्य इकाई में 'वर्चस्व की जंग' शुरू हो गई थी। बोरा का मानना था कि उनके जमीनी संघर्ष को दरकिनार कर दिया गया।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा का इस पर क्या रुख है?

सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने इसे 'घर वापसी' जैसा संकेत दिया और कहा कि असम के विकास के लिए अनुभवी नेताओं का भाजपा के साथ आना जरूरी है। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से बोरा के घर जाकर उन्हें आमंत्रित किया था।