(Holashtak 2026/ Image Credit: IBC24 News)
Holashtak 2026 Start and End Date: हिंदू धर्म में होलाष्टक का विशेष महत्व माना जाता है। यह होली के आठ दिन पहले शुरू होता है और होलिका दहन तक प्रभावी रहता है। इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे कार्य इस समय नहीं किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन आठ दिनों में नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं।
होलाष्टक की पौराणिक कथा राजा हिरण्यकश्यप और भक्त प्रहलाद से जुड़ी है। बताया जाता है कि हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने की योजना बनाई थी। प्रहलाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी, इसलिए पूर्णिमा से आठ दिन पहले उसे कष्ट दिए गए। इस अवधि को होलाष्टक कहा गया। आठवें दिन होलिका ने प्रहलाद को आग में जलाने की कोशिश की, लेकिन भगवान की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका जल गई। इसी वजह से इन आठ दिनों में किसी भी शुभ कार्य को करने से बचने की सलाह दी जाती है।
होलाष्टक के आठ दिनों में शादी विवाह, भूमि या भवन खरीदना, वाहन खरीदना, और किसी भी प्रकार के मांगलिक संस्कार करना अशुभ माना जाता है। नवविवाहिताओं को सलाह दी जाती है कि वे मायके में रहें। लेकिन अगर इन दिनों किसी की मृत्यु होती है तो अंतिम संस्कार और शांति पूजन किया जा सकता है।
इस अवधि में पूजा-पाठ, जप-तप, भगवान विष्णु और शिव की पूजा, तथा अन्य देवी-देवताओं की आराधना करना शुभ माना जाता है। दान-दक्षिणा करना और हर रोज ऋणमोचन स्त्रोत, विष्णु सहस्रनाम, हनुमान चालीसा या श्रीसूक्त का पाठ करना उत्तम माना जाता है।
होलाष्टक में पितरों को तर्पण दें और उनकों याद करें। इस समय ग्रहों की शांति के लिए पूजा या यज्ञ भी करवा सकते हैं। यदि संभव हो, तो मथुरा और वृंदावन की परिक्रमा करना भी लाभकारी माना जाता है। इस प्रकार होलाष्टक में धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य करना सबसे शुभ माना जाता है।