ईयू के साथ एफटीए के तहत सबसे बड़ी व्यापारिक ढील दी गई, व्यापार घाटे पर निगरानी जरूरी: कांग्रेस

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ईयू के साथ एफटीए के तहत सबसे बड़ी व्यापारिक ढील दी गई, व्यापार घाटे पर निगरानी जरूरी: कांग्रेस

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  • Publish Date - January 28, 2026 / 03:55 PM IST,
    Updated On - January 28, 2026 / 03:55 PM IST

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने बुधवार को दावा किया कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत ने सबसे बड़ी व्यापारिक ढील प्रदान की है जिसमें ईयू को लगभग सभी उत्पादों के निर्यात पर शुल्क में कटौती या राहत प्रदान की गई है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि भारत के व्यापार घाटे पर पड़ने वाले प्रभाव पर कड़ी निगरानी रखना ज़रूरी होगा।

भारत और ईयू ने मंगलवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए, जिसे “सबसे बड़ा समझौता” बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने व्यापार और रक्षा सहयोग के साथ आपसी संबंधों को मज़बूत करने तथा नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की दिशा में काम करने के लिए एक व्यापक एजेंडा पेश किया।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पहली बार जून, 2007 में शुरू हुई थी। बातचीत के 16 दौर हुए, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति न बन पाने के कारण मई 2013 में इन्हें निलंबित कर दिया गया। इसके बाद जून 2022 तक एफटीए पर बातचीत स्थगित ही रही, जब इसे फिर से शुरू किया गया।’’

उनका कहना था कि यह बहु-प्रचारित एफटीए अब तक किसी भी व्यापारिक साझेदार को भारत द्वारा दी गई सबसे बड़ी व्यापारिक ढील है, जिसके तहत ईयू से भारत को होने वाले 96 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर शुल्क में कटौती या राहत प्रदान की गई है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इससे भारत के ईयू से आयात के दोगुना होने की उम्मीद की जा रही है तथा इसके परिणामस्वरूप भारत के व्यापार घाटे पर पड़ने वाले प्रभाव पर कड़ी निगरानी रखना ज़रूरी होगा।

उनके मुताबिक, ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ से भारत के एल्युमीनियम और इस्पात निर्माताओं को छूट दिलाने में मोदी सरकार की नाकामी दिखी है जो एफटीए को लेकर कांग्रेस की मुख्य चिंताओं में से एक है।

रमेश ने कहा, ‘‘ईयू के सख़्त स्वास्थ्य और उत्पाद सुरक्षा नियमों को लेकर भी चिंताएं हैं, जो एफटीए के बाद भी भारतीय निर्यात पर लागू रहेंगे। ये आसानी से टैरिफ़-रहित व्यापार अवरोध बन सकते हैं, और ईयू पर अन्य व्यापारिक साझेदारों द्वारा भी इस तरह के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हमारे दवा क्षेत्र के लिए बौद्धिक संपदा के अधिकारों से जुड़े सवाल भी अब तक अनुत्तरित हैं।’’

भाषा हक

हक पवनेश

पवनेश