नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) दिल्ली की आबोहवा को धूल मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने राष्ट्रीय राजधानी के चार प्रमुख मार्गों को ‘आदर्श सड़क’ के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। अधिकारियों का दावा है कि ये सड़कें पूरी तरह से धूल मुक्त होंगी।
यह प्रायोगिक परियोजना वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 160 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क के पुनर्विकास की पीडब्ल्यूडी की एक व्यापक योजना का हिस्सा है।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के लिए चार विशिष्ट सड़कों की पहचान की जाएगी, जहां गड्ढों की मरम्मत, पूरी सड़क को पक्का करने तथा वहां हरियाली बढ़ाने का काम किया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने कहा, “अगर यह परियोजना सफल होती है, तो इसे दिल्ली की अन्य सड़कों पर भी लागू किया जाएगा। सड़कों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है। इन्हें पक्का किया जाएगा और धूल कम करने के अन्य उपाय लागू किए जाएंगे।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस महीने की शुरुआत में वायु प्रदूषण और सड़कों की धूल को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी।
दिल्ली सरकार के मुताबिक, शहर की लगभग 3,300 किलोमीटर लंबी सड़कों को पुनर्निर्माण या उन्नयन की आवश्यकता है, जिसमें से लगभग 800 किलोमीटर सड़कें लोक निर्माण विभाग के अधीन हैं, 1,200 किलोमीटर नगर निगम के तहत आती हैं और लगभग 1,000 किलोमीटर अनधिकृत कॉलोनियों में हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस साल 160 किलोमीटर लंबी सड़कों को पक्का करने का लक्ष्य रखा गया है और व्यापक हरियाली कार्य के लिए 85.70 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग की पहचान की गई है। उन्होंने बताया कि परियोजना की कुल लागत 400 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, पीडब्ल्यूडी इस प्रस्तावित परियोजनाओं के तहत सड़कों के किनारों और उसके डिवाइडर को पूरी तरह से पक्का करने के साथ-साथ वहां पेड़-पौधे लगाने का भी काम करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, “सड़कों की बार-बार खुदाई करने से बचने के लिए भूमिगत पाइप बिछाए जाएंगे। इसके लिए जल्द ही निविदाएं की जाएंगी। इस कार्य को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।”
अधिकारियों ने बताया कि पीडब्ल्यूडी दो और परियोजनाओं पर काम शुरू करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहली परियोजना के तहत, सड़कों के लिए 70 सफाई मशीनें और पानी की टंकियां, जबकि दूसरी परियोजना के तहत, धूल को उड़ने से रोकने के लिए पानी छिड़कने वाली 250 मशीनें तैनात की जाएंगी।
भाषा प्रचेता पारुल
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