कोलकाता पुस्तक मेले के आयोजन से जुड़ना चाहता है भाजपा समर्थित प्रकाशक निकाय
कोलकाता पुस्तक मेले के आयोजन से जुड़ना चाहता है भाजपा समर्थित प्रकाशक निकाय
कोलकाता, 17 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित प्रकाशकों का एक संगठन 2027 के आरंभ में होने वाले 50वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले से पहले ‘पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड’ के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है जिससे इस बात को लेकर टकराव पैदा होने की आशंका है कि इस अहम कार्यक्रम का आयोजन कौन करेगा।
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी ‘बंगिया ग्रंथशिल्प परिषद’ ने प्रकाशकों, किताब विक्रेताओं, प्रिंटर और दूसरे संबंधित लोगों को एकजुट करना शुरू कर दिया है। उसका कहना है कि वह पुस्तक मेले को और ज़्यादा समावेशी बनाना चाहता है और प्रकाशन जगत के एक बड़े हिस्से को इसके प्रबंधन में अपनी बात रखने का मौका देना चाहता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब गिल्ड सॉल्ट लेक सेंट्रल पार्क के ‘बोई मेला प्रांगण’ में ऐतिहासिक 50वें पुस्तक मेले की तैयारी कर रहा है। गिल्ड ने 1976 में कोलकाता पुस्तक मेले की शुरुआत के समय से उसका आयोजन किया है।
परिषद के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने वाला सांस्कृतिक आयोजन बन चुका यह बड़ा मेला किसी एक संगठन के नियंत्रण में नहीं रहना चाहिए और इसमें दूसरे प्रकाशक संगठनों की भी भूमिका होनी चाहिए।
भाजपा समर्थित इस संगठन ने हाल में यहां दिवंगत लेखक बुद्धदेव गुहा की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रकाशन क्षेत्र के कई प्रतिनिधियों को एक साथ इकट्ठा किया था। इससे संकेत मिलता है कि परिषद इस मेले के स्वर्ण जयंती संस्करण से पहले एक वैकल्पिक संगठनात्मक मंच बनाना चाहती है।
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने रविवार को कहा कि प्रकाशकों और पुस्तकविक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 13 संगठन हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पुस्तक मेला एक सामूहिक आयोजन है, इसलिए इसमें सभी संबंधित पक्षों को जगह मिलनी चाहिए।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने परिषद द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पार्टी सांस्कृतिक क्षेत्र पर अपना नियंत्रण थोपने की कोशिश नहीं करेगी लेकिन मेले पर किसी एक राजनीतिक पार्टी का एकाधिकार नहीं होना चाहिए।
हालांकि, इस पहल से पश्चिम बंगाल के साहित्य और प्रकाशन जगत में यह अटकलें लगने लगी हैं कि क्या परिषद आखिरकार 2027 के मेले के आयोजन में कोई औपचारिक भूमिका निभा सकती है।
उधर, गिल्ड का कहना है कि कोलकाता पुस्तक मेले की अंतरराष्ट्रीय पहचान दशकों की मेहनत का नतीजा है और इसकी विरासत को रातों-रात फिर से खड़ा नहीं किया जा सकता।
सन् 1975 में स्थापित ‘पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड’ ने 1976 में पहला कलकत्ता पुस्तक मेला आयोजित किया था। गिल्ड के अधिकारी अपु डे ने बताया कि बाद में इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और यह दुनिया के सबसे बड़े गैर-व्यावसायिक पुस्तक मेलों में से एक बन गया।
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश

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