धर्मस्थल मामले के ‘साजिशकर्ताओं’ को बेनकाब करने के लिए जांच एनआईए को सौपी जाएं : भाजपा

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धर्मस्थल मामले के ‘साजिशकर्ताओं’ को बेनकाब करने के लिए जांच एनआईए को सौपी जाएं : भाजपा

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  • Publish Date - August 23, 2025 / 06:50 PM IST,
    Updated On - August 23, 2025 / 06:50 PM IST

बेंगलुरु, 23 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई ने शनिवार को राज्य की कांग्रेस सरकार से आग्रह किया कि वह धर्मस्थल मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंप दे, ताकि मामले के शिकायतकर्ता के पीछे छिपे ‘‘साजिशकर्ताओं, विदेशी हस्तक्षेपकर्ताओं और इसके लिए धन मुहैया कराने वालों’’ को बेनकाब किया जा सका।

शिकायतकर्ता ने धर्मस्थल में पिछले दो दशकों के दौरान कई लोगों की हत्या, दुष्कर्म और शवों को दफनाए जाने का दावा किया है।

शिकायतकर्ता को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसकी पहचान सीएन चिन्नैया के रूप में हुई है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा, ‘‘यह शिकायतकर्ता हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है, उसके पीछे के साजिशकर्ता महत्वपूर्ण हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। सरकार को यह साबित करने के लिए कि वे निष्पक्ष जांच कर रहे हैं और हिंदुओं का अपमान नहीं कर रहे हैं, एक अलग एसआईटी का गठन करना होगा।’’

अशोक ने कहा, ‘‘अगर कांग्रेस और डीके शिवकुमार (उपमुख्यमंत्री) जरा-भी गंभीर हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि षड्यंत्रकारियों का पर्दाफाश हो। उन्हें इसके लिए एक एसआईटी बनानी चाहिए या मामले को एनआईए को सौंप देना चाहिए। जैसा कि कहा जा रहा है कि पैसा विदेश और दूसरे राज्यों से आया है, इसलिए एनआईए जांच जरूरी है।’’

यह उल्लेख करते हुए कि कई भाजपा सांसदों ने मामले की एनआईए जांच की मांग करते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है, अशोक ने कहा, ‘‘बेहतर होगा कि राज्य सरकार केंद्र के आदेश से पहले एनआईए जांच के लिए खुद सहमति दे। यदि राज्य की कांग्रेस सरकार मामले को एनआईए को नहीं सौंपती है, तो इसमें कांग्रेस की भूमिका स्पष्ट हो जाएगी।’’

राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी पिछले दो दशकों में धर्मस्थल के विभिन्न स्थानों पर हुई कई हत्याओं, बलात्कारों और शवों को दफनाने के आरोपों की जांच कर रही है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने भी मांग की कि मामले की गहन जांच की जानी चाहिए और धर्मस्थल क्षेत्र को निशाना बनाकर साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

भाषा शफीक पारुल

पारुल