भाजपा, जद(एस) ने कर्नाटक के राज्यपाल के कथित अपमान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया

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भाजपा, जद(एस) ने कर्नाटक के राज्यपाल के कथित अपमान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 04:26 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 04:26 PM IST

बेंगलुरु, 27 जनवरी (भाषा) कर्नाटक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) ने मंगलवार को यहां विधान सौध में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया और राज्य विधान मंडल के संयुक्त सत्र के दौरान राज्यपाल थावरचंद गहलोत का कथित रूप से ‘‘अपमान और अनादर’’ करने के लिए कांग्रेस के कुछ विधायकों को निलंबित करने की मांग की।

कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग की।

उन्होंने कथित आबकारी विभाग घोटाले को लेकर आबकारी मंत्री आर. बी. टिम्मापुर को हटाने की भी मांग की। साथ ही राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति, महिलाओं की सुरक्षा में कमी जैसे मुद्दों को भी उठाया।

विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष के नेता क्रमश: आर. अशोक और चालवाड़ी नारायणस्वामी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र, भाजपा विधान परिषद सदस्य सी. टी. रवि, जद (एस) नेता सुरेश बाबू और एस.एल. भोजेगौड़ा समेत दोनों पार्टियों के कई विधायक तथा एमएलसी भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र ने यहां मीडिया से बात करते हुए 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के उत्पाद शुल्क घोटाले की विस्तृत जांच किए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जांच या तो उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश द्वारा या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जानी चाहिए।

विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि पूरे देश ने सदन के अंदर राज्यपाल के प्रति कांग्रेस के ‘गुंडों’ को गुंडागर्दी करते हुए देखा है।

संयुक्त सत्र के दौरान राज्यपाल के प्रति अवमानना और कथित दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘(कांग्रेस) सरकार अब उन कार्रवाइयों को उचित ठहराने की कोशिश कर रही है।’’

कर्नाटक विधानसभा में 22 जनवरी को उस समय नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला था, जब राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण को संयुक्त सत्र में पढ़ने से इनकार कर दिया और मात्र तीन पंक्तियों में अपना परंपरागत भाषण समाप्त कर दिया। इस पर राज्य सत्तारूढ़ दल के सदस्यों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।

तीन पंक्तियों का भाषण समाप्त करने के बाद जैसे ही राज्यपाल बाहर निकलने के लिए आगे बढ़े, सत्तारूढ़ दल के कुछ विधायक नारेबाजी करते हुए उन्हें घेरने की कोशिश करने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें वहां से हटाया। इन सदस्यों में विधान परिषद सदस्य हरिप्रसाद भी शामिल थे।

विजयेंद्र ने दावा किया कि टिम्मापुर का नाम आबकारी घोटाले में सामने आया है और यहां तक ​​कि मंत्री के परिवार के सदस्यों का भी नाम लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं।

अशोक ने कहा, ‘‘हर एक लाइसेंस के लिए करोड़ों की रिश्वत देनी पड़ती है। मुख्यमंत्री भी इस रैकेट से लाभ उठा रहे हैं, इसलिए उन्हें की गई शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मुख्यमंत्री को भ्रष्ट आबकारी मंत्री का तत्काल इस्तीफा सुनिश्चित करना चाहिए; अन्यथा, हमारा विरोध मुख्यमंत्री के खिलाफ ही होगा।’’

प्रदर्शन के दौरान कोप्पल से कांग्रेस सांसद राजशेखर बसवराज हितनाल के उस कथित बयान का भी ज़िक्र किया गया, जिसमें उन्होंने एक विदेशी महिला से बलात्कार और हत्या की घटना को मामूली बताया था। इसके अलावा कांग्रेस पर झूठा प्रचार करने के आरोप और केंद्र सरकार के नए रोजगार गारंटी कानून ‘विकसित भारत जी राम जी’ के खिलाफ कांग्रेस के विरोध को भी प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।

भाषा यासिर माधव

माधव