भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष बने

भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष बने

भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष बने
Modified Date: November 29, 2022 / 07:54 pm IST
Published Date: November 25, 2020 1:25 pm IST

पटना, 25 नवंबर (भाषा) नवगठित विधानसभा के प्रथम बहुमत परीक्षण में बिहार में सत्तारूढ़ राजग बुधवार को विजयी रहा जिसके उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा भारी मतों के अंतर से विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए।

भाजपा के वरिष्ठ नेता सिन्हा को प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी ने निर्वाचित घोषित किया। मांझी ने सदन को बताया कि राजग उम्मीदवार को 126 वोट मिले जबकि विपक्षी महागठबंधन के उम्मीदवार अवध बिहारी चौधरी को 114 मत हासिल हुए।

243 सदस्यीय विधानसभा में बसपा के एकमात्र विधायक ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और प्रोटेम स्पीकर मांझी ने भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया और विपक्षी महागठबंधन के भी संभवत: एक विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए।

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के पांच विधायकों ने भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ वोट दिया।

विपक्ष के हंगामे के बीच चुनाव हुआ जिसने मांग की कि गुप्त मतदान कराया जाए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी कैबिनेट के जो भी नेता विधानसभा के सदस्य नहीं हैं उन्हें सदन से बाहर जाने के लिए कहा जाए।

अध्यक्ष ने मांग को खारिज कर दिया, जिसका विपक्ष ने जोरदार विरोध किया जिस कारण सदन को पांच मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। इस पर सत्ता पक्ष ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के समय इस तरह की बाधा पहले कभी नहीं आई।

कार्यवाही की शुरुआत चार विधायकों के शपथ ग्रहण के साथ शुरू हुयी जो पिछले दो दिनों में शपथ नहीं ले सके थे। इनमें जद (यू) के अनिरूद्ध प्रसाद यादव और नरेन्द्र कुमार नीरज, राजद के अनंत कुमार सिंह और भाकपा (माले) के अमरजीत कुशवाहा शामिल हैं।

यादव हाल में कोविड-19 से ठीक हुए हैं और उन्होंने पीपीई किट पहनकर शपथ ली ।

मांझी ने सदन को जैसे ही सूचित किया कि विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा तो एआईएमआईएम के राज्य अध्यक्ष अख्तरूल इमान अपनी सीट से खड़े हुए और सुझाव दिया कि सदन ‘‘की परंपरा है कि विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से क्रमश: सत्तारूढ़ पक्ष और विपक्ष से होता है।’’

गौरतलब है कि बिहार में हुए पिछले 16 विधानसभा चुनाव में केवल दो बार अध्यक्ष का चुनाव हुआ। 1967 में जब राज्य में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी और दो वर्ष बाद जब मध्यावधि चुनाव के बाद नये विधानसभा का गठन हुआ।

भाषा नीरज नीरज उमा

उमा


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