भाजपा नेता कर्नाटक के राज्यपाल से मिले, नफरती भाषण संबंधी विधेयक को मंजूरी न देने का आग्रह किया

भाजपा नेता कर्नाटक के राज्यपाल से मिले, नफरती भाषण संबंधी विधेयक को मंजूरी न देने का आग्रह किया

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  • Publish Date - January 12, 2026 / 07:16 PM IST,
    Updated On - January 12, 2026 / 07:16 PM IST

बेंगलुरु, 12 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलकर उनसे नफरती भाषण संबंधी विधेयक को मंजूरी न देने का अनुरोध किया और इसे ‘दमनकारी’, ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला’ और ‘राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार’ बताया।

विधानमंडल के दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं क्रमश: आर. अशोक और चालवाड़ी नारायणस्वामी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें बल्लारी में झड़प की सीबीआई जांच की मांग की गई।

राज्य में कानून-व्यवस्था के कथित तौर पर बिगड़ती स्थिति और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए एक और प्रतिवेदन भी दिया गया है, जिसमें हुबली घटना को रेखांकित किया गया है, जहां पुलिस पर एक महिला भाजपा कार्यकर्ता के कपड़े उतारने का आरोप है।

अशोक ने कहा,’हमने राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें बताया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई है और यह गुंडा राज्य बन गया है। कोई सवाल न होने के कारण कर्नाटक जंगल राज बन गया है। …हमने राज्यपाल से कर्नाटक को गुंडा राज्य बनने से बचाने का अनुरोध किया है।’

राज्यपाल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन्हें कर्नाटक घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध (निवारण) विधेयक को मंजूरी न देने का अनुरोध करते हुए एक याचिका सौंपी है।

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर ने सदन में बिना किसी चर्चा के घृणास्पद भाषण विधेयक पारित करवाया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सत्ताधारी कांग्रेस की ‘धूर्तता’ का ही एक दोहराव है, क्योंकि यह उस स्थिति के समान है जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया था।

उन्होंने कहा, “हमने राज्यपाल को बताया है कि यदि विधेयक को मंजूरी दी जाती है, तो इससे मीडिया और विपक्षी दलों के सरकार का विरोध और आलोचना करने के अधिकार छिन जाएंगे, क्योंकि राज्य एक पुलिस राज्य में बदल जाएगा। ऐसे हालात में लोकतंत्र कायम नहीं रह सकता। इसलिए, हमने राज्यपाल से विधेयक को मंजूरी न देने का अनुरोध किया है, क्योंकि यह राज्य के लिए हानिकारक है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीन लेगा।”

लोक भवन (राज्यपाल निवास) ने शुक्रवार को एक बयान में कहा था कि हाल में हुए विधानसभा सत्र के दौरान पारित कर्नाटक घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध (निवारण) विधेयक ‘विचाराधीन’ है।

इस विधेयक में घृणा अपराध के लिए एक वर्ष की कैद का प्रावधान है जिसे सात वर्ष की कैद तक बढ़ाया जा सकता है तथा 50,000 रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव है। बार-बार अपराध करने पर अधिकतम सात वर्ष की कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना होगा।

अशोक ने बल्लारी की घटना का जिक्र करते हुए कहा, “ यह भाजपा विधायक जी. जनार्दन रेड्डी को निशाना बनाकर किया गया हमला था जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ता की हत्या उसी के दल के लोगों ने कर दी। घटना की जांच दिशाहीन होती जा रही है। इस घटना के पीछे के लोगों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और मामले को बंद करने के प्रयास जारी हैं।’

उन्होंने कहा कि तथ्यों के सामने आने के लिए सीबीआई जांच होनी चाहिए, क्योंकि पुलिस से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती, जो सरकार के हाथों की कठपुतली बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा 17 जनवरी को बल्लारी में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी।

इसके अलावा, अशोक ने कहा कि सरकार जिस तेजी से उत्तरी बेंगलुरु के कोगिलु इलाके में अवैध रूप से बने मकानों के तोड़े जाने के बाद बेघर हुए लोगों को फिर से बसाने का काम कर रही है, इस बात की जानकारी भी राज्यपाल को दे दी गई है।

भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर ‘मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति’ करने का आरोप लगाया है, क्योंकि ध्वस्त किए गए अधिकांश अवैध मकान कथित तौर पर मुसलमानों के थे।

भाषा नोमान प्रशांत

प्रशांत