भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं ने राहुल के आवास तक मार्च निकाला, महिलाओं को अधिकार नहीं देने का आरोप

Ads

भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं ने राहुल के आवास तक मार्च निकाला, महिलाओं को अधिकार नहीं देने का आरोप

  •  
  • Publish Date - April 18, 2026 / 09:20 PM IST,
    Updated On - April 18, 2026 / 09:20 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) महिला आरक्षण कानून संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं होने के विरोध में शनिवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला सांसदों और नेताओं ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुनहरी बाग स्थित आवास के निकट तक विरोध मार्च निकाला।

मोती लाल नेहरू मार्ग पर एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों ने गांधी का पुतला फूंका और उनके आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।

पार्टी की राज्य इकाई के एक बयान में बताया गया कि सुनहरी मस्जिद चौराहे के पास, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, सांसद बांसुरी स्वराज, कमलजीत सहरावत और हेमा मालिनी सहित अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर उन्हें संसद मार्ग थाने ले जाया गया।

लोकसभा में शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित नहीं हो पाने के कारण भाजपा की महिला सांसदों हेमा मालिनी, मंजू शर्मा और वात्सल्य गुप्ता सहित प्रदर्शनकारियों ने विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की और उन पर देश की महिलाओं को ‘अपमानित’ करने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘ देश की आधी आबादी को पिछले 30 वर्षों से अपमान सहना पड़ रहा है क्योंकि यह विधेयक बार-बार पेश किया गया लेकिन या तो उसे खारिज कर दिया गया या उसका विरोध किया गया।’

उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की महिलाएं उनके साथ हुए अन्याय के खिलाफ अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराएंगी।

मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने कहा, ‘यह हमारे लिए बहुत दुखद दिन है। ऐसा लगता है कि विपक्ष को महिलाओं की शक्ति पर भरोसा नहीं है और वे उन्हें उनके अधिकार नहीं देना चाहते।’

पार्टी ने दावा किया कि विरोध मार्च में 10,000 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया।

सचदेवा ने कहा कि विपक्षी नेता एक ‘शाही परिवार’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जो अपने परिवार से आगे नहीं देख सकते।

उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि महिलाओं को एक दिन उनके उचित अधिकार जरूर मिलेंगे।

विधायिकाओं में 2029 से आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान संशोधन विधेयक सदन में पारित नहीं हो पाया। विधेयक के समर्थन में 298 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। विधेयक को पारित होने के लिए 528 सदस्यीय सदन में दो-तिहाई यानी 352 सदस्यों के समर्थन की जरूरत थी।

भाषा

प्रचेता रंजन

रंजन