नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद शनिवार को उन पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी नीयत साफ नहीं है और उन्हें महिला आरक्षण के नाम पर एक कुटिल परिसीमन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के कपटपूर्ण प्रयासों के लिए महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए थी।
मुख्य विपक्षी दल के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री को अपनी बात पर इतना भरोसा है तो उन्हें महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर लोकसभा भंग कर जनता से नया बहुमत मांगना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘पिछले 12 वर्षों में दिखाने के लिए कुछ भी सार्थक नहीं होने के कारण हताश और निराश प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम एक आधिकारिक संबोधन को एक राजनीतिक भाषण में बदल दिया, जो कीचड़ उछालने और पूरी तरह से झूठ से भरा था।’’
उन्होंने कहा, मैं आदर्श आचार संहिता पहले से ही लागू है और यह बहुत स्पष्ट था कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी ने अपने विरोधियों पर हमला करने के लिए आधिकारिक मशीनरी का दुरुपयोग किया। यह लोकतंत्र और भारत के संविधान का मजाक है। ‘
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में 59 बार कांग्रेस का जिक्र किया और बमुश्किल कुछ ही बार महिलाओं का उल्लेख किया, जो देश को उनकी प्राथमिकताओं के बारे में सब कुछ बताता है।
खरगे के मुताबिक, महिलाएं भाजपा की प्राथमिकता नहीं हैं और कांग्रेस महिलाओं के साथ है, क्योंकि वह इतिहास के सही पक्ष पर खड़ी है।
उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है। हम वह पार्टी थी जिसने 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित किया था ताकि यह समाप्त न हो। भाजपा ने उस विधेयक को लोकसभा में पारित नहीं करा पाई। भाजपा 2023 में एक और विधेयक लाई और कांग्रेस पार्टी ने उसका भी समर्थन किया। वह विधेयक अभी भी मौजूद है।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘दरअसल, 2023 के अधिनियम को बीते 16 अप्रैल को अधिसूचित किया गया था, जब लोकसभा इन परिसीमन संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर चर्चा कर रही थी। तथ्य यह है कि भाजपा को अपने स्वयं के विधेयक को अधिसूचित करने में तीन साल लग गए, यह भारत की नारी शक्ति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘किसी मौजूदा प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन उस पद की गरिमा से जुड़ा होता है। इसका उद्देश्य बिना किसी पक्षपात के राष्ट्र के संकल्प और आत्मविश्वास को मजबूत करना होता है। लेकिन आज का बेहद निराशाजनक और पूरी तरह से पक्षपात से भरा भाषण था।’
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह राष्ट्र के नाम संबोधन की बजाय एक ‘निराशा से भरा संबोधन’ ज्यादा लगा , जिसे संवाददाता सम्मेलन में देना ज़्यादा उचित होता।
रमेश ने कहा, ‘लेकिन कल रात लोकसभा में मिली करारी विधायी हार से विचलित प्रधानमंत्री में अब भी मीडिया का सामना करने की हिम्मत नहीं है।’
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने अपने संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा से पारित न करा पाने के लिए माफी मांगी है। लेकिन वास्तव में उन्हें महिलाओं के नाम पर परिसीमन के एक कुटिल प्रस्ताव को ज़बरदस्ती पारित कराने के अपने बेशर्मी और कपट से भरे प्रयासों के लिए माफी मांगनी चाहिए थी। इस पूरे मामले में उनकी नीयत साफ नहीं, स्पष्ट रूप से खोटी है।’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘अगर उनकी नीयत को समझना हो, तो यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’, जो सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पास हो गया था, उसे 30 महीने की देरी के बाद 16 अप्रैल 2026 की देर रात को अधिसूचित क्यों किया गया।’ कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के जीवन भर के आचरण को देखते हुए, महिला सम्मान की उनकी बातें पूरी तरह से पाखंड लगती हैं।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘ आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह कहा कि देशभर की महिलाएं कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों को कड़ा जवाब देंगी एवं सबक सिखाएंगी। यदि उन्हें अपनी बात पर इतना भरोसा है तो उन्हें इसी मुद्दे पर लोकसभा भंग कर देश में चुनाव करवा कर इस मुद्दे पर नया बहुमत मांगना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि 2026 की जातिगत जनगणना की बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना ओबीसी महिलाओं के हक को लूटने जैसा था क्योंकि 2026 की जनगणना के बाद देश में ओबीसी की संख्या पता चलेगी और उनके लिए भी आरक्षण मिल सकेगा।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बंगाल एवं तमिलनाडु के चुनावों के बीच इस तरह का संबोधन आचार संहिता का उल्लंघन है।
उन्होंने दावा किया, ‘परन्तु निर्वाचन आयोग भाजपा का निर्वाचन विभाग बन गया है इसलिए कोई कार्रवाई नहीं करेगा।’
भाषा हक खारी नेत्रपाल
नेत्रपाल