बीएमडब्ल्यू हादसे के पीड़ित को जानबूझकर दूर के अस्पताल ले जाया गया: दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया

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बीएमडब्ल्यू हादसे के पीड़ित को जानबूझकर दूर के अस्पताल ले जाया गया: दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया

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  • Publish Date - January 23, 2026 / 04:37 PM IST,
    Updated On - January 23, 2026 / 04:37 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने यहां की एक अदालत को बताया कि पिछले साल सितंबर में धौला कुआं के पास एक तेज रफ्तार कार (बीएमडब्ल्यू) की चपेट में आए वित्त मंत्रालय के 52 वर्षीय अधिकारी नवजोत सिंह को जानबूझकर दूर के अस्पताल में ले जाया गया था और यह दुर्घटना महिला चालक की गलती के कारण हुई थी।

न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग ने पिछले साल दिसंबर में दायर आरोपपत्र का बृहस्पतिवार को संज्ञान लेते हुए पुलिस की दलीलें सुनीं।

अदालत ने कहा, ‘‘निरीक्षक श्योराम ने बताया कि यह दुर्घटना आरोपी (बीएमडब्ल्यू कार की चालक गगनप्रीत मक्कड़) की गलती के कारण हुई और वह पीड़ित को जानबूझकर दूर के अस्पताल ले गई।’’

अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के साथ-साथ धारा 281 (तेज गति से वाहन चलाना), 125 बी (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) और 238 ए (सबूतों को गायब करना) के तहत आरोपपत्र दायर किया गया है।

अदालत ने पुलिस अधिकारी के इस बयान पर गौर किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट दाखिल की गई थी, जिसके अनुसार पीड़ित की मौके पर ही मौत हो सकती थी या दुर्घटना के बाद वह 5 से 15 मिनट तक ही जीवित रह सकता था, क्योंकि ‘‘बहुत अधिक खून बहा’’ था।

बयान में यह भी बताया गया कि दुर्घटना दोपहर 1:30 बजे हुई थी, जिसके बाद मक्कड़ पीड़ित को दोपहर 1:37 बजे अस्पताल के लिए लेकर निकली और दोपहर 2:15 बजे तक वहां पहुंची।

अदालत ने आरोपियों को समन जारी किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए दो फरवरी की तारीख तय की।

पिछले साल 14 सितंबर को वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में उप सचिव सिंह की मोटरसाइकिल रिंग रोड स्थित दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास मक्कड़ द्वारा चलाई जा रही बीएमडब्ल्यू कार की चपेट में आ गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी।

इस घटना में सिंह की पत्नी समेत तीन लोग घायल हो गए थे।

इससे पहले, न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग के समक्ष दायर 400 पन्नों के आरोपपत्र में पुलिस ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने जानबूझकर पीड़ित को महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में देरी की।

आरोपपत्र में कहा गया कि यह दुर्घटना दोपहर करीब 1:30 बजे हुई, जब मक्कड़ की तेज गति वाली बीएमडब्ल्यू एक्स5 कार (जिसे कथित तौर पर 100-110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा रहा था) दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास एक मेट्रो पिलर से टकराकर पलट गई और इस दौरान हरि नगर निवासी सिंह की मोटरसाइकिल को भी टक्कर मार दी।

इसमें आरोप लगाया गया कि दुर्घटना पीड़ितों को पास के अस्पतालों जैसे दिल्ली कैंटोनमेंट अस्पताल या एम्स ट्रॉमा सेंटर, जो 10-15 मिनट की दूरी पर थे, ले जाने के बजाय, मक्कड़ घायलों को दुर्घटनास्थल से लगभग 20 किलोमीटर दूर जीटीबी नगर स्थित नुलाइफ अस्पताल ले गई, जहां पहुंचने में 23 मिनट लगे।

आरोपपत्र में कहा गया कि नुलाइफ अस्पताल दो मंजिला छोटा-सा नर्सिंग होम है, जहां केवल सीमित चिकित्सा सुविधाएं ही उपलब्ध हैं।

भाषा संतोष पारुल

पारुल

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