‘प्री-ऑर्डर’ के लिए उपलब्ध पुस्तक और प्रकाशित पुस्तक का मतलब एक नहीं: पेंगुइन प्रकाशन
‘प्री-ऑर्डर’ के लिए उपलब्ध पुस्तक और प्रकाशित पुस्तक का मतलब एक नहीं: पेंगुइन प्रकाशन
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की ‘अप्रकाशित’ पुस्तक को लेकर चल रहे विवाद के बीच, प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) ने मंगलवार को कहा कि किसी पुस्तक के बारे में घोषणा या ‘पूर्व-ऑर्डर’ के लिए इसकी उपलब्धता को प्रकाशन नहीं समझा जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा नरवणे के 2023 के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देने के बाद ‘पीआरएचआई’ ने स्पष्टीकरण जारी किया। नरवणे ने उस पोस्ट में लोगों को सूचित किया था कि विचाराधीन संस्मरण, ‘‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’’, ‘अब उपलब्ध है’।
‘‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया में पुस्तक प्रकाशन कैसे करता है, इस बारे में एक त्वरित मार्गदर्शिका’’ शीर्षक के तहत अपने बयान में, प्रकाशक ने कहा, ‘‘घोषित पुस्तक, प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध पुस्तक और प्रकाशित पुस्तक का मतलब एक नहीं हैं।’’
इसमें आगे निर्धारित बिंदुओं में यह स्पष्ट किया गया है कि जब किसी पुस्तक की घोषणा की जाती है, तो इसका मतलब केवल यह होता है कि प्रकाशक ने भविष्य में इसे प्रकाशित करने की योजना साझा की है और यह पुस्तक अभी बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है।
बयान में कहा गया है कि इसी तरह, किसी पुस्तक को ‘प्री-ऑर्डर’ के लिए सूचीबद्ध करना एक मानक प्रकाशन प्रथा है, जो पाठकों और खुदरा विक्रेताओं को प्रकाशन से पहले अग्रिम ऑर्डर देने की अनुमति देती है।
बयान में यह भी जोड़ा गया है कि इस प्रकार सूचीबद्ध करने का मतलब यह नहीं है कि पुस्तक ‘प्रकाशित या उपलब्ध’ हो गई है।
प्रकाशक ने यह भी कहा कि प्रकाशन की निर्धारित तिथि केवल एक नियोजित प्रकाशन समयसीमा दर्शाती है, इसका अर्थ यह नहीं है कि पुस्तक बाजार में उपलब्ध है।
बयान में कहा गया है, ‘‘पुस्तक तभी प्रकाशित मानी जाती है जब वह खुदरा विक्रेताओं के पास बिक्री के लिए उपलब्ध हो।’’ प्रकाशक ने यह भी कहा कि वह अपनी प्रकाशन प्रक्रियाओं में स्पष्टता और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है।
पीआरएचआई ने शुरू में कहा था कि पुस्तक की कोई भी प्रति ‘‘मुद्रित या डिजिटल रूप में प्रकाशित, वितरित या बेची नहीं गई है’’।
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए गांधी ने नरवणे की 2023 की सोशल मीडिया पोस्ट (तत्कालीन ट्विटर पर) पढ़कर सुनाई, जिसमें लिखा था, ‘‘दोस्तो। मेरी किताब अब उपलब्ध है। बस लिंक पर क्लिक करें। पढ़ने का आनंद लें। जय हिंद।’’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘यह श्री नरवणे का ट्वीट है। मेरा कहना यह है कि या तो श्री नरवणे झूठ बोल रहे हैं, और मुझे विश्वास है कि (पूर्व) सेना प्रमुख झूठ नहीं बोलेंगे, या फिर पेंगुइन झूठ बोल रहा है। दोनों ही सच नहीं बोल सकते।’’
दिल्ली पुलिस ने पांडुलिपि को डिजिटल और अन्य प्रारूपों में कथित तौर पर अवैध रूप से प्रसारित करने के आरोप में एक प्राथमिकी दर्ज की है।
भाषा
सुरेश नरेश
नरेश

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