(जाफरी मुदससर नोफिल)
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) हाल ही में प्रकाशित एक किताब में असम की 11 महिलाओं की हज यात्रा से जुड़े अनुभवों के बारे में बताया गया है, जिनमें उनकी यात्रा से जुड़ी वास्तविक चिंताएं, व्यावहारिक सलाह, विचार और भावनाओं को जगह दी गई है।
पत्रकार टेरेसा रहमान की पुस्तक “हर हज स्टोरी” स्पीकिंग टाइगर ने प्रकाशित की है।
रहमान ने बताया कि असम और मेघालय की मुस्लिम महिलाओं में हज अनुभव पर संस्मरण लिखने की परंपरा रही है।
रहमान ने कहा कि ये संस्मरण ज्यादातर असमिया और कुछ बांग्ला भाषा में लिखे गए थे तथा कई महिलाओं ने इन्हें हाथ से लिखा, टाइप करवाया और फिर छपवाया।
रहमान ने अलग-अलग स्रोतों से इन संस्मरणों को जुटाया।
उन्होंने बताया कि कुछ कहानियां उस समय की हैं, जब हवाई यात्रा उपलब्ध नहीं थी और मुंबई से जहाज के जरिए हज के लिए जाना पड़ता था।
किताब में आबिदा खातून की कहानी के बारे में बताया गया है, जो 2007 में पति के साथ हज पर गई थीं।
पुस्तक में कहा गया है कि मदीना पहुंचने के चार दिन बाद उनके पति का निधन हो गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत बनाए रखी और अकेले रहकर अपनी हज यात्रा पूरी की। 17 साल बाद वह अपनी बेटी के साथ दोबारा हज पर गईं।
किताब में सैयदा सुरैया बेगम, जैबुन्निसा, सिराजुन निसा, सैयदा सकीना अशरफ, आयशा अशरफ अहमद, खैरुन निसा चौधरी, जहांआरा हजारिका और मल्लिका रहमान के अनुभव भी शामिल हैं।
भाषा जोहेब नेत्रपाल
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