ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: शी चिनफिंग सात साल बाद भारत आए
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: शी चिनफिंग सात साल बाद भारत आए
नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार को नयी दिल्ली की दो दिवसीय यात्रा शुरू की।
यह पिछले सात वर्ष में उनकी पहली भारत यात्रा है और इसे व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार के जरिये द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार शाम शी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
ऐसा बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे और आपसी संपर्क बढ़ाने के लिए नए कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
शी की इस यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच हाल में कई उच्चस्तरीय वार्ताएं हुई हैं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में हुई विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता भी शामिल है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में चीन के आक्रामक सैन्य रुख को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली हवाई अड्डे पर शी की अगवानी की। इस दौरान सांस्कृतिक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर चीन के राष्ट्रपति का स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शी का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘सहयोग को आगे बढ़ाने और अधिक संतुलित, प्रतिनिधित्वपूर्ण एवं बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में योगदान देने की दिशा में ब्रिक्स लगातार आगे बढ़ रहा है तथा ऐसे में हमें रचनात्मक चर्चा होने की उम्मीद है’’
शी के प्रतिनिधिमंडल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य काई ची और सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य एवं विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हैं।
शी की यात्रा संबंधी जानकारियां रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि यह यात्रा पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण तनावपूर्ण हुए भारत-चीन संबंधों को और सामान्य बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार साल से अधिक समय तक रहे सैन्य गतिरोध के कारण बिगड़े संबंधों को सुधारने के लिए पिछले कुछ महीनों में विश्वास बहाली के कई कदम उठाए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मोदी और शी के बीच वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर समग्र स्थिति की समीक्षा किए जाने तथा व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार समेत द्विपक्षीय संबंधों को और सामान्य बनाने के उपाय तलाशे जाने की उम्मीद है।
दोनों नेताओं के बीच बैठक शाम छह बजे निर्धारित है।
मोदी और शी ने पिछले साल 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर व्यापक मुद्दों पर वार्ता की थी।
डोभाल ने पिछले महीने के अंत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि (एसआर) स्तर की वार्ता की थी। इसमें सीमा निर्धारण, सीमा पार सहयोग से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने और एलएसी पर शांति बनाए रखने पर मुख्य रूप से चर्चा हुई थी।
डोभाल और वांग दोनों सीमा वार्ता तंत्र के लिए नामित विशेष प्रतिनिधि हैं। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद का व्यापक समाधान तलाशने के लिए यह तंत्र 2003 में स्थापित किया गया था।
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने शुक्रवार को कहा, ‘‘चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप भारत के साथ मिलकर काम करेगा, द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखेगा, संवाद बढ़ाएगा, सहयोग मजबूत करेगा, मतभेदों का उचित ढंग से समाधान करेगा तथा अच्छे पड़ोसियों की तरह मित्र और एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाला साझेदार बनेगा।’’
भाषा सिम्मी नेत्रपाल
नेत्रपाल

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