कोलकाता, 31 अगस्त (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक पार्टी कार्यालय को लेकर कांग्रेस और टीएमसी के बीच जारी लड़ाई की तुलना आजादी से पहले दिल्ली की गद्दी के लिए हुई लड़ाई से की।
अदालत ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की एक याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें उन्होंने पुलिस को मुर्शिदाबाद जिले के नोवदा में स्थित पार्टी कार्यालय का कब्जा कांग्रेस को वापस दिलाने का निर्देश देने की मांग की थी।
चौधरी का दावा था कि 2018 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस कार्यालय पर कब्जा कर लिया था।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत पुलिस अधिकारियों को इस तरह के कदम उठाने का निर्देश देने के पक्ष में नहीं है।
अदालत ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता का दावा है कि संबंधित इमारत पर किसी दूसरी पार्टी ने कब्जा कर लिया है, तो वह संपत्ति पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए दीवानी अदालत का रुख कर सकता है।
अदालत ने पुलिस को इलाके में शांति और व्यवस्था बनाए रखने तथा यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कोई अप्रिय घटना न हो।
चौधरी ने दावा किया कि कांग्रेस को 2004 में नाओदा में बनाए गए उसके पार्टी कार्यालय से बेदखल कर दिया गया था।
आरोप है कि मुर्शिदाबाद जिले के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अबू ताहेर खान 2018 में टीएमसी में शामिल हो गए थे और उस समय राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के सांसद के रूप में उन्होंने जबरन पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया था।
जब चौधरी के वकील ने कहा कि विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय पर दोबारा कब्जा लेने गए थे, लेकिन ऐसा नहीं कर सके, तब न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से कहा कि यह स्थिति दिल्ली के सिंहासन के लिए हुई लड़ाई जैसी लगती है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, “पहले मोहम्मद गोरी ने जीत हासिल की, फिर सल्तनत आई, उसके बाद मुगल और फिर अंग्रेज आए।”
तेरहवीं सदी की शुरुआत से लेकर 1947 में भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने तक, अलग-अलग राजवंशों ने दिल्ली के सिंहासन पर कब्जा किया, जिसकी नींव मुहम्मद गोरी ने रखी थी।
न्यायाधीश ने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी को संबंधित पार्टी कार्यालय पर कब्जे को लेकर कोई विवाद है, तो उसे याद रखना चाहिए कि 2018 से उस कार्यालय पर टीएमसी का कब्जा था।
उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल बदल गया है, अदालत पुलिस अधिकारियों को उक्त परिसर को खाली करवाकर कांग्रेस को सौंपने का निर्देश नहीं दे सकती।
भाषा जोहेब माधव
माधव