नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) भारत के डेविस कप कप्तान रोहित राजपाल ने सोमवार को अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के अध्यक्ष पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी।
उनके इस फैसले से राष्ट्रीय टेनिस महासंघ में पिछले एक दशक से चली आ रही निर्विरोध पदाधिकारियों के चुनाव की परंपरा खत्म होने की उम्मीद है।
एआईटीए के अंतरिम अध्यक्ष चिंतन पारिख के भी अक्टूबर में होने वाले चुनाव में पूर्ण कार्यकाल के लिए अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की संभावना है।
यह देखना भी दिलचस्प होगा कि दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस भी इस दौड़ में शामिल होते हैं या नहीं। माना जा रहा है कि वह एसओएम (उत्कृष्ट योग्यता वाले खिलाड़ी) के रास्ते एआईटीए प्रशासन में प्रवेश कर सकते हैं।
दिल्ली लॉन टेनिस संघ (डीएलटीए) के अध्यक्ष राजपाल ने कहा कि वह खिलाड़ी-केंद्रित दृष्टिकोण, बेहतर प्रशासन और पारदर्शिता के जरिए टेनिस के विकास और विस्तार में योगदान देना चाहते हैं।
अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए राजपाल ने एक बयान में कहा, “टेनिस मेरे लिए सिर्फ एक खेल नहीं है, यह मेरी जिंदगी रहा है।”
उन्होंने कहा, “इस सफर ने मुझे अब आगे बढ़कर एआईटीए के अध्यक्ष पद के लिए अपनी उम्मीदवारी घोषित करने का आत्मविश्वास दिया है। यह भारत में टेनिस के विकास और विस्तार में योगदान देने की मेरी इच्छा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
पीठ की चोट के कारण राजपाल का खेल करियर समय से पहले समाप्त हो गया था। उन्होंने कहा कि टेनिस तब से उनकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है और खेल प्रशासन में वर्षों के अनुभव के बाद अब वह आगे बढ़ रहे हैं।
राजपाल ने कहा कि उनकी सोच भारतीय टेनिस की संभावनाओं से प्रेरित है, खासकर ऐसे समय में जब भारत 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी पेश कर रहा है।
कई डेविस कप मुकाबलों में भारत के गैर-खिलाड़ी कप्तान की भूमिका निभा चुके राजपाल ने कहा कि देश के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ काम करना और उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करना उनके लिए सम्मान की बात रही है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के शीर्ष 100 में कोई भारतीय खिलाड़ी नहीं होने के बावजूद डेविस कप में भारत के नतीजे टीम की “कौशल और इच्छाशक्ति” के प्रमाण हैं।
1980 के दशक के खिलाड़ी रहे राजपाल बाद में एशियाई खेलों में पदक जीतने में सफल रहे। पीठ की गंभीर चोट के बाद उनका खेल करियर समय से पहले समाप्त हो गया और अंततः उन्हें बड़ी सर्जरी भी करानी पड़ी।
इसके बाद राजपाल ने खेल प्रशासन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह भारतीय ओलंपिक संघ की कार्यकारी समिति के सदस्य, एआईटीए के पदाधिकारी और डीएलटीए के अध्यक्ष रह चुके हैं।
उन्होंने ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल के ‘शेफ डी मिशन (दल प्रमुख)’ की जिम्मेदारी भी संभाली थी, जहां उन्होंने शीर्ष स्तर के सक्षम और पैरा खिलाड़ियों से जुड़े रोजमर्रा के मामलों के समन्वय में भूमिका निभाई।
भाषा आनन्द सुधीर
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