क्या राम मंदिर चढ़ावा ‘चोरी’ की जांच के लिए एसआईटी बनाई जा सकती है: न्यायालय ने उप्र से पूछा

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क्या राम मंदिर चढ़ावा ‘चोरी’ की जांच के लिए एसआईटी बनाई जा सकती है: न्यायालय ने उप्र से पूछा

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 04:48 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 04:48 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने की संभावना के बारे में जानकारी मांगी और याचिकाकर्ताओं को चेतावनी दी कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से निर्देश लेने को कहा कि क्या स्थानीय पुलिस के बजाय एसआईटी को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिसने प्राथमिकी दर्ज होने से पहले पूरे मामले की जांच की थी।

सीजेआई ने कहा, “बस एक बात का ध्यान रखें। कृपया इस मामले को राजनीतिक रंग न दें। अदालतें राजनीति की जगह नहीं हैं। यह अपराध का एक साधारण मामला है। हम (यहां) सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि इसकी ठीक से जांच हो।”

शुरुआत में, मेहता ने कहा कि पहले के आदेश का पालन करते हुए राज्य सरकार ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है।

उन्होंने कहा, “जांच चल रही है। आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मैं ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता।”

जब पूछा गया कि क्या एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है, तो मेहता ने कहा, “एसआईटी का गठन सच्चाई का पता लगाने के लिए किया गया था। अब पुलिस इसकी जांच कर रही है। एसआईटी ने बस यह पाया कि यह एक संज्ञेय अपराध है।”

पीठ ने गौर किया कि उस एसआईटी में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और लखनऊ के पुलिस महानिरीक्षक शामिल थे और पूछा कि क्या वे निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य जांच कर सकते हैं।

पीठ ने कहा कि वह अगले सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी और कुछ निर्देश जारी करेगी।

पीठ ने 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस को इस मामले में स्थिति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।

इसने चढ़ावे में हुई कथित चोरी की निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच की मांग वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया था।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश