पटना, 21 जुलाई (भाषा) बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने विद्यालयों की खराब स्थिति का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छह माह में स्थिति सुधारने का दावा किया।
सदस्यों ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं, जिनके भवन या तो जर्जर होकर गिर चुके हैं या फिर दो कमरों में 500 से 600 विद्यार्थियों की पढ़ाई कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि अगले छह महीने में स्थिति सुधर जायेगी।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन को बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में निर्धारित मानक की तुलना में लगभग 63 हजार अधिक शिक्षक हैं।
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक एवं सत्ता पक्ष के उप मुख्य सचेतक मनजीत सिंह ने कहा कि 33 जिलों में 2,294 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों का अपना भवन नहीं है।
उन्होंने अपनी ही सरकार को घेरते हुए कहा कि 26 जिलों में 703 उच्च विद्यालय तथा तीन हजार उच्चतर विद्यालय भी अपने भवन से वंचित हैं।
इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि 2,276 प्राथमिक तथा 792 उच्चतर विद्यालयों के अपने भवन नहीं हैं, लेकिन सरकार इनके निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि बिहार के लगभग 40 प्रतिशत विद्यालयों के भवन गिर चुके हैं, जिसके कारण उन विद्यालयों को दूसरे गांवों में स्थानांतरित करना पड़ा है।
उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या विभाग ने कभी यह समीक्षा कराई है कि राज्य की किस पंचायत में कितने विद्यालयों के भवन जर्जर या ध्वस्त हो चुके हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक जीवेश कुमार ने भी विद्यालयों में आधारभूत संरचना की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि किसी विद्यालय में केवल दो कमरे हों और उनमें 500 से 600 बच्चे पढ़ते हों तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधर सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी पंचायतों में उच्च विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय लगभग 600 से 700 विद्यालय ऐसे थे, जहां भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी, ऐसे में जहां दो कमरे भी उपलब्ध थे, वहां तत्काल पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि पहले दसवीं और बाद में इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई प्रारंभ की गई।
इस बीच, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से जुड़े प्रश्नों पर भी सदन में विस्तृत चर्चा हुई। जदयू विधायक श्याम रजक ने बाबा साहब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
रजक ने कहा कि इन विद्यालयों में लगभग 62 प्रतिशत शिक्षक पद अभी भी रिक्त हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन रिक्त पदों पर नियुक्ति कब तक पूरी की जाएगी।
इस पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के कुल 3,456 पद स्वीकृत हैं तथा कुल 96 विद्यालय स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्तमान में 91 संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उच्च माध्यमिक स्तर के 46 विद्यालय हैं, जबकि चार विद्यालय निर्माणाधीन हैं।
रौशन ने कहा कि उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए 1,456 तथा अन्य स्तर के विद्यालयों के लिए 950 शिक्षक पद स्वीकृत हैं, इस प्रकार वर्तमान में संचालित विद्यालयों में कुल 2,406 शिक्षक पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 1,290 पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं।
मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से 1,048 पदों पर नियुक्ति की अनुंशंसा भेजी है तथा आयोग द्वारा भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही नियुक्तियां की जाएंगी।
राजद विधायक गौतम ने शिक्षा मंत्री से पूछा कि सरकार ने शिक्षक बहाली के लिए जारी कैलेंडर में अगस्त से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल क्यों नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि 2025 में भी शिक्षक नियुक्ति का निर्धारित कैलेंडर लागू नहीं हो सका और 2026 में भी अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
शिक्षा मंत्री तिवारी ने कहा कि अगले पांच वर्षों में राज्य में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 20 हजार शिक्षकों की बहाली का लक्ष्य रखा गया है।
भाषा कैलाश
राजकुमार
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