जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने से 2,000 लोगों को नौकरी जाने का डर, एक और विरोध-प्रदर्शन शुरू

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने से 2,000 लोगों को नौकरी जाने का डर, एक और विरोध-प्रदर्शन शुरू

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने से 2,000 लोगों को नौकरी जाने का डर, एक और विरोध-प्रदर्शन शुरू
Modified Date: August 18, 2026 / 02:57 pm IST
Published Date: August 18, 2026 2:57 pm IST

रांची, 18 अगस्त (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद कम से कम 2,000 लोगों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इन लोगों को डर है कि परीक्षा पास करने के बाद मिली उनकी सरकारी नौकरियां छिन सकती हैं।

झारखंड सचिवालय के बाहर मंगलवार को धरने पर बैठे सफल अभ्यर्थियों में से एक ने कहा, ‘‘हमें हमारा अपराध बताइए। हमें नौकरी से बाहर मत कीजिए।’’ अभ्यर्थी निष्पक्ष रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग कर रहे हैं।

परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के लगातार विरोध के बीच झारखंड सरकार ने सोमवार रात झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। साथ ही, वर्ष 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) द्वारा कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला किया गया।

यह फैसला परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में से एक था और इससे आंदोलन समाप्त होने की संभावना थी। लेकिन अब सरकार के सामने एक नई चिंता खड़ी हो गई है, क्योंकि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों को अपनी नौकरियां खोने का डर सता रहा है।

ये अभ्यर्थी अब सरकारी कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि वे कथित अनियमितताओं की जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के साथ-साथ सफल अभ्यर्थी भी अब सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सफल अभ्यर्थी कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडेय ने उनकी परेशानी को स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी उनके प्रति सहानुभूति रखती है।

हालांकि, सरकार की ओर से यह आश्वासन कि नयी रिक्तियों के जरिए योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिलेंगे, इन अभ्यर्थियों की चिंता कम नहीं कर पाया। इनमें से कई अभ्यर्थी अब अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं।

कुछ ने भूख हड़ताल और आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

झारखंड सचिवालय के बाहर भावुक अपील करते हुए सहायक अनुभाग अधिकारी कौशल कुमार ने कहा, ‘‘हमें अदालत के आदेश के बाद नियुक्त किया गया था। हम सभी दस्तावेज लेकर आए हैं। परीक्षा रद्द मत कीजिए। इसकी जांच कीजिए। सीबीआई जांच कराइए या जो भी जांच आपको उचित लगे, कराइए, लेकिन हमारे साथ अन्याय मत कीजिए।’’

सोमवार रात इन सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने की कोशिश की, लेकिन वे उनसे मुलाकात नहीं कर सके। उस समय सोरेन अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ लंबी बैठक कर रहे थे। बैठक में सरकार ने कथित अनियमितताओं के कारण भर्ती परीक्षाएं रद्द करने की जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच की मांग स्वीकार करने का फैसला किया।

एक अन्य नियुक्त अभ्यर्थी चंदा कुमारी ने सवाल उठाया कि क्या उम्मीदवारों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र का मतलब है कि 100 दोषी छूट जाएं, लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि फैसला लेने से पहले सफल अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

कुमारी ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से आती हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर 14वीं जेपीएससी परीक्षा तथा वन रेंज अधिकारी की मुख्य परीक्षा पास की है। उन्होंने इस आरोप को खारिज किया कि नियुक्ति पाने वाले सभी अभ्यर्थियों ने कथित गड़बड़ी से सामूहिक रूप से लाभ उठाया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सब नौकरियां खरीद नहीं सकते थे।’’

कुमारी ने आरोप लगाया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी उनके खिलाफ साबित होने से पहले ही उन्हें सजा दी जा रही है।

अभ्यर्थियों ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए पिछली न्यायिक कार्यवाहियों का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया की जांच और अदालत में भी इसकी समीक्षा हो चुकी है। दिसंबर में दिए गए अपने फैसले में उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के अनुरोध को खारिज करते हुए कहा था कि मौजूदा विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच पर्याप्त है।

अब इन अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार कथित गड़बड़ी के आरोपियों और निष्पक्ष तरीके से नौकरी हासिल करने वाले उम्मीदवारों के बीच स्पष्ट अंतर करे।

एक अन्य प्रदर्शनकारी एस. के. सिंह ने कहा कि सफल अभ्यर्थियों के खिलाफ लगाए गए मुख्य आरोप अब तक साबित नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई उम्मीदवार कानूनी प्रक्रिया के बाद अपनी नौकरी पर नियुक्त हो चुके हैं और वर्षों तक इंतजार करने के बाद उन्हें यह नौकरी मिली है।

कौशल कुमार ने दावा किया कि 500 से अधिक सफल अभ्यर्थियों ने राज्य में नियुक्ति मिलने के बाद केंद्र सरकार की नौकरियां छोड़ दी थीं।

सरकार ने भर्ती व्यवस्था में लोगों का विश्वास बहाल करने के उद्देश्य से परीक्षाएं रद्द करने के अपने फैसले का बचाव किया है।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सफल अभ्यर्थी कानूनी उपाय अपना सकते हैं।

झामुमो के प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि पार्टी ‘‘तानाशाही सरकार’’ नहीं चला रही है और उन्होंने स्वीकार किया कि सफल अभ्यर्थियों की परेशानी जायज है।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा


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