झारखंड प्रदर्शन: भर्ती परीक्षा रद्द होने पर देवेंद्र महतो, दो अन्य प्रदर्शनकारियों ने अनशन खत्म किया
झारखंड प्रदर्शन: भर्ती परीक्षा रद्द होने पर देवेंद्र महतो, दो अन्य प्रदर्शनकारियों ने अनशन खत्म किया
रांची, 18 अगस्त (भाषा) झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे छह प्रदर्शनकारियों में से तीन ने अपना अनशन खत्म कर दिया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2014 से आउटसोर्स एजेंसी के जरिए आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की, जिसके बाद जेएलकेएम नेता देवंद्र महतो सहित तीन प्रदर्शनकारियों ने अपना अनशन खत्म कर दिया।
महतो 16 दिनों से अनशन पर थे। उन्होंने सोमवार आधी रात के आसपास भूख हड़ताल खत्म कर दी।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के एक सदस्य ने बताया कि महतो के अलावा दो और प्रदर्शनकारियों — प्रेम नायक और उम्मे हबीबा ने भी अपना अनशन खत्म कर दिया है। वहीं, तीन अन्य — राहुल क्रांति, सबिता कुमारी और रूपेश पाल — का अनशन जारी है।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है।
मंगलवार को विरोध प्रदर्शन का 25वां दिन है। आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के माध्यम से आयोजित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा समेत सभी भर्ती परीक्षाएं राज्य सरकार द्वारा रद्द किए जाने के बाद, प्रदर्शनकारी आंदोलन वापस लेने का फैसला कर सकते हैं।
प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने कहा, ‘‘आज हमारे विरोध प्रदर्शन का 25वां दिन है। सरकार की घोषणा के बाद हम तय कर सकते हैं कि प्रदर्शन जारी रखें या इसे खत्म कर दें।’’
सोमवार को राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की लंबी बैठक के बाद परीक्षा रद्द करने की घोषणा की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली परीक्षा सुधार समिति भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को मजबूत करने के उपाय सुझाएगी।
सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी। हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फैसला किया है।’’
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद छात्रों को जश्न मनाते और तिरंगा लहराते हुए देखा गया।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए महतो को बधाई दी और सरकार के फैसले को ‘‘सभी की जीत’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि यह ऐसी जीत है जिसमें किसी की हार नहीं हुई। आपकी जीत हुई और सरकार की भी, क्योंकि सरकार भी अच्छा करना चाहती है। इसलिए यह ऐसी जीत है जिसमें दूसरे पक्ष को हार का सामना नहीं करना पड़ा। यह सभी की जीत है — भारत की, जनता की और झारखंड की जीत।’’
हालांकि, सोमवार रात सरकार के इस फैसले के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग कथित परीक्षा अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराना है, जिसे सरकार ने स्वीकार नहीं किया है।
सदर अस्पताल में इलाज करा रहे प्रदर्शनकारी राहुल क्रांति ने कहा कि जब तक सरकार सीबीआई जांच की मांग स्वीकार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने मंगलवार को छात्रों को ‘‘आंदोलन के पहले चरण में संघर्ष के जरिए जीत हासिल करने’’ पर बधाई दी।
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘इस आंदोलन के पहले चरण में संघर्ष के जरिए मिली जीत पर आप सभी को हार्दिक बधाई और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।’’
वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंतित है और उसने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले ही ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम’ लागू कर दिया है।
हेमंत सोरेन ने कहा, ‘‘सीआईडी और विशेष अन्वेषण टीम की ओर से परीक्षा में गड़बड़ी की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अभी इनका खुलासा नहीं किया जा सकता।’’ उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में संचालित हो रही कई कंपनियां एक ‘बड़े परीक्षा गिरोह’ में शामिल प्रतीत हो रही हैं।
प्रदर्शनकारियों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की घोषणा की थी और राज्यभर के छात्रों से रांची में एकत्र होने की अपील की थी।
उन्होंने मुख्यमंत्री सोरेन के इस्तीफे की भी मांग की थी और आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस गठबंधन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई करने में विफल रहा है।
परीक्षा में सफल होकर सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों का एक समूह राज्य सचिवालय के बाहर एकत्र हुआ और मुख्यमंत्री सोरेन से परीक्षा रद्द नहीं करने की अपील की। उनका दावा था कि परीक्षा रद्द होने से करीब 2,000 लोगों की नौकरी चली जाएगी।
विपक्षी पार्टी भाजपा ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से छात्रों की मांगें मानने का आग्रह किया और सवाल उठाया कि अगर सरकार को भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा है, तो उसे सीबीआई जांच से डर क्यों होना चाहिए।
इस बीच, परीक्षा में कथित अनियमितताओं में शामिल आरोपियों को पकड़ने के लिए अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की छापेमारी जारी रही।
सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मनोज कौशिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के संबंध में जेएसएससी कार्यालय में छापेमारी कर रहे हैं।’’
भाषा सुभाष मनीषा
मनीषा

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