नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को छात्र संघ चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्देश नहीं दे सकता, क्योंकि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो उन्हें इस तरह का अधिकार देता हो।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान की। इस जनहित याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनावों में ‘रोटेशन’ (बारी-बारी) के आधार पर महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का निर्देश देने की अपील की गई थी।
डूसू चुनाव 18 सितंबर को प्रस्तावित हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 10 सितंबर है।
पीठ ने कहा कि अदालत ‘ऐसे मामलों’ पर विचार नहीं करती जिनमें केवल यह कहा जाए कि ‘ऐसा होना चाहिए’। साथ ही, पीठ ने याचिकाकर्ता से वह कानून दिखाने को कहा जो महिलाओं को डूसू के आरक्षित पदों के लिए दावा करने का अधिकार देता हो।
न्यायालय ने कहा, ‘हम आपके अधिकारों की रक्षा करने के लिए यहां हैं। हम कोई अधिकार बना नहीं सकते। हमें बताएं कि यह अधिकार (महिलाओं के लिए आरक्षण का) कहां से आता है? आप हमसे एक अधिकार बनाने के लिए कह रहे हैं।’
पीठ ने याचिका पर दिल्ली विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को तय की।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश