नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) कांग्रेस सांसद हरीश चंद्र मीणा ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अधिकारियों की सेवा शर्तों एवं पदोन्नति से संबंधित विधेयक बिना आवश्यक चर्चा के जल्दबाजी में लाया गया और उन्होंने इसे गहन विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने की मांग की।
उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र बल पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरूआत करते हुए यह सवाल भी किया कि ऐसी क्या नौबत आ गई कि इस व्यवस्था को हम नहीं चला पा रहे हैं?
उनका कहना था, ‘‘यह पक्ष-विपक्ष की बात नहीं है। इस पर पार्टी हित से उपर उठ कर चर्चा करनी चाहिए।’’
मीणा ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी के बीच मतभेद होता है, तो पहलगाम और बालाकोट जैसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने दावा किया, ‘‘कर्मचारियों और अधिकारियों का सुरक्षा पर ध्यान नहीं है, वह तो मुकदमे लड़ने में लगे हैं।’’
उन्होंने सरकार से कहा कि इस विधेयक पर गहन चर्चा और मंथन करने की जरूरत है, फिर जो सहमति बने उस आधार पर निर्णय लिया जाए।
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘सीएपीएफ में 96 प्रतिशत कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल कांस्टेबल और एएसआई हैं। 11 लाख कर्मियों वाले अर्धसैनिक बलों में 100 आईपीएस अधिकारी हैं, उन्हें आप नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं। 3,000 राजपत्रित अधिकारी हैं, उन्हें आप नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं। 96 प्रतिशत (जवानों) की आप सुन ही नहीं रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आपने किसी से चर्चा नहीं की। यह बिना चर्चा के जल्दी में लाया गया विधेयक है। मैं इसका विरोध करता हूं।’’
इससे पहले, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में चर्चा और पारित कराने के विधेयक को पेश किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं माननीय गृह मंत्री जी की ओर से प्रस्ताव करता हूं कि विधेयक पर राज्यसभा द्वारा पारित तय रूप में विचार किया जाए।’’
इस पर, विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना गृह मंत्री के चर्चा कैसे शुरू हो सकती है, यह गलत है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कहा, ‘‘नहीं सर, गृह मंत्री को (सदन में) होना चाहिए।’’
इस पर, लोकसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी सदस्यों से कहा, ‘‘बैठिये, ज्ञान मत बांटिए, कौन सी किताब में लिखा है कि गृह राज्य मंत्री विधेयक को पेश नहीं कर सकते। नियम बताइए। नियम प्रक्रिया से सदन चलेगा। आप नहीं बताएंगे कि कौन (सदन में) होना चाहिए कौन नहीं होना चाहिए।’’
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने एक संशोधन प्रस्तुत करते हुए कहा कि विधेयक को 15 सदस्यीय प्रवर समिति को भेजा जाए, साथ ही निर्देश दिया जाए कि इसपर लोकसभा के अगले सत्र के प्रथम सप्ताह के आखिरी दिन रिपोर्ट सौंपी जाए।
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सुभाष हक
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