खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष के प्रभाव से निर्यातकों को राहत देने को कई उपायों की घोषणा: डीजीएफटी

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खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष के प्रभाव से निर्यातकों को राहत देने को कई उपायों की घोषणा: डीजीएफटी

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  • Publish Date - April 2, 2026 / 08:33 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 08:33 PM IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के प्रभाव से निर्यातकों को राहत देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाये हैं। खाड़ी क्षेत्र भारत के रत्न और आभूषण, चावल और औषधि जैसी वस्तुओं के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है, जिनका मूल्य 2024-25 में लगभग 57 अरब अमेरिकी डॉलर था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह कहा।

पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों के प्रभावों पर विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के संवाददाता सम्मेलन में विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) लव अग्रवाल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय युद्ध जोखिम को लेकर बीमा वृद्धि और व्यापार वित्त संबंधी मुद्दों पर बीमा कंपनियों और बैंकों के साथ बातचीत कर रहा है।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि मंत्रालय तनाव के बदलते स्वरूप को समझने और समस्याओं के समाधान के लिए व्यवस्था विकसित करने को लेकर निर्यातकों के साथ नियमित रूप से बैठकें कर रहा है।

अग्रवाल ने कहा कि इस संघर्ष से खाड़ी क्षेत्र में वस्तु निर्यात करने वाले निर्यातकों के लिए चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। भारत का खाड़ी क्षेत्र के साथ 2024-25 में 178 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार था (जिसमें 56.87 अरब डॉलर का निर्यात और 121.67 अरब डॉलर का आयात शामिल था)।

जिन प्रमुख क्षेत्रों पर दबाव है उनमें पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन और प्लास्टिक, इंजीनियरिंग सामान, चावल, औषधि और रत्न एवं आभूषण शामिल हैं।

इस क्षेत्र के छह देश संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, कतर और कुवैत हैं।

उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र बासमती चावल, समुद्री उत्पादों और ताजे कृषि उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। ताजे फलों और सब्जियों के परिवहन के लिए हवाई और समुद्री माल ढुलाई लागत में भारी वृद्धि हुई है।

अग्रवाल ने कहा कि प्रमुख बाजारों के लिए भुगतान चैनल दबाव में आ सकते हैं और इससे खाद्य एवं कृषि क्षेत्र के सामानों के लिए ऋण चक्र भी प्रभावित हो सकता है।

रत्न एवं आभूषणों के लिए, विदेश व्यापार महानिदेशक ने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) एक प्रमुख निर्यात बाजार और स्रोत केंद्र दोनों है।

सोने के आभूषणों का निर्यात दबाव में है, जबकि जीसीसी से सोने की छड़ों और कच्चे हीरों के आयात में भी समस्या आ रही है।

डीजीएफटी के अनुसार, विनिर्माण संकुलों में एलपीजी की कमी धातु पिघलाने और रत्न प्रसंस्करण को प्रभावित कर रही है।

जहाजों के मार्ग परिवर्तन से परिवहन लागत बढ़ रही है और पोत परिवहन कंपनियों ने युद्ध जोखिम अधिभार लागू कर दिया है। इससे इस क्षेत्र में इंजीनियरिंग निर्यात प्रभावित हो रहा है।

फाउंड्री, फोर्जिंग और मशीनिंग इकाइयों के लिए एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जबकि एल्युमीनियम की आपूर्ति भी बाधित हुई है, क्योंकि खाड़ी स्थित प्रमुख बंदरगाहों ने इंजीनियरिंग सामानों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी है।

इसी तरह, महत्वपूर्ण औषधि सामग्री भी प्रभावित हुई है और लघु एवं मध्यम उद्यम कच्चे माल के संकट का सामना कर रहे हैं।

अग्रवाल ने कहा कि निर्यातकों की मदद के लिए, वाणिज्य मंत्रालय ने दो मार्च को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन और समन्वय करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है।

उन्होंने बताया कि समूह अब तक 20 बैठकें कर चुका है और प्रभावित क्षेत्र में भारत से जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एक विशेष उप-समूह का गठन किया गया है।

भाषा रमण पाण्डेय

पाण्डेय