नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 के संबंध में विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि यह सीएपीएफ के किसी भी वर्ग के अहित में नहीं है और यह बलों को अधिक सशक्त बनाने में सहायक होगा।
राय ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि विधेयक इस सदन के समक्ष केवल एक विधायी प्रस्ताव के रूप में ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ और संगठित बनाने के लिए लाया गया है।
कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए सदन ने मंत्री के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। राज्यसभा ने बुधवार को विधेयक को मंजूरी प्रदान की थी। इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गयी।
मंत्री ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अधिकारियों की सेवा शर्तों में उत्पन्न प्रशासनिक अस्पष्टता तथा कैडर प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे इन बलों की कार्यकुशलता और मनोबल, दोनों को सुदृढ़ किया जाएगा।
उन्होंने विधेयक का विरोध करने वाले सदस्यों पर प्रहार करते हुए कहा, ‘‘जहां तक मैं समझता हूं विपक्ष ने इसमें अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास किया है। उन्होंने कंफ्यूजन में डालने का प्रयास किया और खुद भी कंफ्यूजन में हैं। वे या तो विधेयक को समझ नहीं पाए, या समझ पाए तो ना समझदार बनने का दिखावा किया।’’
सीएपीएफ कर्मियों की पदोन्नति के संबंध में विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाये गए मुद्दों पर मंत्री ने कहा कि विभिन्न पदोन्नति समितियों का नियमित रूप से गठन किया जाता है और यह (पदोन्नति) समय पर सुनिश्चित की जाती है।
उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में वरिष्ठता संबंधित विवादों के अदालतों में लंबित होने या अनुशासनात्मक कार्रवाइयों के कारण पदोन्नति में देर होती है।
राय ने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा, ‘‘यह विधेयक सीएपीएफ के किसी भी वर्ग या श्रेणी के अहित में नहीं है। यह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रशासनिक ढांचे में आवश्यक स्पष्टता और सुव्यवस्था प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’’
उन्होंने कहा कि यह विधेयक सीएपीएफ को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक होगा।
भाषा सुभाष अविनाश
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