नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन कार्यालय ज्ञापन जारी किए हैं, जिसमें उन्हें गोद लेने की प्रक्रियाओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने, गोद लिए गए बच्चों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और बच्चों की पहचान की रक्षा करने का निर्देश दिया गया है।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक सीएआरए ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (जैसा कि 2021 में संशोधित किया गया) और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के प्रावधानों के अनुसार राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (एसएआरए) को ये निर्देश जारी किए हैं।
अधिनियम के तहत गोद लेने का उद्देश्य अधिनियम की धारा 56(1) के तहत परिकल्पित अनाथ, परित्यक्त और आत्मसमर्पण किए गए बच्चों के लिए परिवार के अधिकार को सुरक्षित करना है।
बयान के मुताबिक, पहले ज्ञापन में, देश में दत्तक ग्रहण संबंधी सर्वोच्च संस्था सीएआरए ने किसी बच्चे को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित करने से पहले वैधानिक प्रक्रियाओं और समय-सीमाओं के अनिवार्य पालन को दोहराया है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि उचित जांच, जैविक माता-पिता का पता लगाने, परिवार से पुन: मिलाने के प्रयासों और निर्धारित समय सीमा के भीतर अन्य वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा किए बिना किसी भी अनाथ या परित्यक्त बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित नहीं किया जा सकता है।
बयान में कहा गया है कि सरेंडर किये गए बच्चों के मामले में, अधिनियम के तहत निर्धारित दो महीने की अनिवार्य पुनर्विचार अवधि का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और उसके बाद ही बच्चे को दोबारा गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित किया जाना चाहिए।
बयान के मुताबिक, दूसरे ज्ञापन में बच्चों और गोद लिए गए व्यक्तियों के रिकॉर्ड की सुरक्षा, रखरखाव और हस्तांतरण संबंधी नीतिगत स्पष्टीकरण जारी किया गया।
बयान में कहा गया है कि रिकॉर्ड को तब तक नष्ट, खारिज या अप्राप्य नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किया जाए। इसमें आगे जोड़ा गया कि ये प्रावधान अधिनियम की धारा 99 के अनुरूप हैं, जो बच्चों से संबंधित रिपोर्ट और रिकॉर्ड की गोपनीयता को अनिवार्य बनाती है
तीसरे कार्यालय ज्ञापन में, सीएआरए ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जो कानून का कथित उल्लंघन करने वाले बच्चों या देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान का खुलासा करने पर रोक लगाती है।
राज्यों को सभी संबंधित संस्थानों और अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियों या बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों की तस्वीरें, वीडियो या पहचान संबंधी विवरण सोशल मीडिया सहित किसी भी प्रकार के संचार में प्रकट न किए जाएं।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप