नाबालिगों के बीच सहमति से बने संबंधों से जुड़े मामलों से सावधानीपूर्वक निपटने की जरूरत: अदालत

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नाबालिगों के बीच सहमति से बने संबंधों से जुड़े मामलों से सावधानीपूर्वक निपटने की जरूरत: अदालत

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  • Publish Date - April 3, 2026 / 12:06 AM IST,
    Updated On - April 3, 2026 / 12:06 AM IST

नैनीताल, दो अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कहा कि नाबालिगों के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों से जुड़े मामलों से सावधानीपूर्वक निपटने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ ने नाबालिगों के बीच संबंधों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए अंतरिम उपाय के रूप में अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी।

यह मामला करीब 15 वर्ष की आयु के दो नाबालिगों के बीच आपसी सहमति से बने संबंध से संबंधित है।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से सावधानीपूर्वक निपटने की जरूरत है क्योंकि नाबालिगों की सुरक्षा और कुछ परिस्थितियों में उनकी स्वायत्तता को मान्यता देने के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

लड़की के पिता ने आरोपी पर उनकी बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया।

बचाव पक्ष ने हालांकि दलील दी कि लड़का और लड़की एक-दूसरे को लगभग चार साल से जानते थे और उनके बीच घनिष्ठ मित्रता थी।

बचाव पक्ष के वकील ने यह भी कहा कि लड़की ने शुरू में शारीरिक संबंध बनाने से इनकार किया था लेकिन बाद में उसने मजिस्ट्रेट को बताया कि वह लड़के के संपर्क में थी और उनके बीच का संबंध आपसी सहमति से था।

वकील ने अदालत को बताया कि दोनों चार साल से दोस्त थे और लड़की ने स्वीकार किया कि उसने लड़के को अपने घर बुलाया था, उसे अलमारी में छिपाया था, उसे खाना खिलाया था और उनके बीच शारीरिक संबंध बने थे।

उन्होंने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में भी लड़की के साथ किसी प्रकार के जबरदस्ती के संकेत नहीं मिले।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि लड़के को निगरानी गृह में रखने से उसके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और इसलिए मामले में नरम रुख अपनाया जाना चाहिए।

अदालत ने पाया कि नाबालिगों के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों में लड़की का बयान महत्वपूर्ण होता है।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक प्रणाली को नाबालिगों की सुरक्षा और विशिष्ट परिस्थितियों में उनकी स्वायत्तता को मान्यता देने के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।

अदालत ने कहा कि उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है।

अदालत ने प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए देहरादून स्थित किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष जारी कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।

भाषा सं दीप्ति जितेंद्र

जितेंद्र