कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के आदेश को बरकरार रखा

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के आदेश को बरकरार रखा

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के आदेश को बरकरार रखा
Modified Date: August 25, 2026 / 07:02 pm IST
Published Date: August 25, 2026 7:02 pm IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने मंगलवार को कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्युआरसी) की उस सिफारिश को बरकरार रखा, जिसमें कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक नौ हजार क्यूसेक पानी दिया जाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

यह फ़ैसला दिल्ली में एस.के. हलदर की अध्यक्षता में हुई सीडब्ल्यूएमए की 56वीं बैठक में लिया गया। इस बैठक में तमिलनाडु, कर्नाटक, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और केरल के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

तमिलनाडु के जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत एम. वाडनेरे और कावेरी तकनीकी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष थिरु सुब्रमण्यन ने इस बैठक में हिस्सा लिया।

यह बैठक उच्च न्यायालय के उस निर्देश के बाद हुई, जिसमें अदालत ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार से कहा था कि वह कर्नाटक द्वारा कावेरी के पानी में अपने हिस्से का पानी छोड़े जाने को लेकर अपनी शिकायत सीडब्ल्यूएमए के सामने उठाए।

कर्नाटक के अधिकारी गौरव गुप्ता ने कहा, ‘सीडब्ल्यूआरसी के अनुसार, 15 दिनों में 11.6 टीएमसी पानी छोड़ा जाना है। हमने उनसे इसे घटाकर छह हजार क्यूसेक करने का अनुरोध किया था। तमिलनाडु ने पानी छोड़ने की मात्रा को बढ़ाकर 28 टीएमसी करने की मांग की थी। बैठक में हुई सभी चर्चाओं के बाद, सीडब्ल्यूएमए ने सीडब्ल्यूआरसी की सिफारिश को ही दोहराया।’

सीडब्ल्यूआरसी ने सोमवार को अपनी 141वीं बैठक में कर्नाटक को अपने जलाशयों से पानी छोड़ने और बिलिगुंडुलु सीमा बिंदु पर 9,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। यह प्रवाह लगातार 15 दिनों तक बनाए रखना होगा, इस दौरान तमिलनाडु को करीब 11.66 टीएमसी पानी मिलने की उम्मीद है।

पानी छोड़े जाने से कुरुवई फसल की खेती में मदद मिलने और तमिलनाडु की पेयजल जरूरतें पूरी होने की उम्मीद है।

इससे पहले सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को 12 अगस्त से 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इसके बाद सीडब्ल्यूएमए ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।

भाषा राखी माधव

माधव


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