कावेरी जल: न्यायालय ने कहा- आनुपातिक हिस्से के संबंध में शिकायत सीडब्ल्यूएमए के समक्ष उठा सकता है तमिलनाडु

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कावेरी जल: न्यायालय ने कहा- आनुपातिक हिस्से के संबंध में शिकायत सीडब्ल्यूएमए के समक्ष उठा सकता है तमिलनाडु

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  • Publish Date - August 24, 2026 / 04:15 PM IST,
    Updated On - August 24, 2026 / 04:15 PM IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार से कहा कि वह कर्नाटक से कावेरी नदी का आनुपातिक हिस्सा छोड़ने के संबंध में अपनी शिकायत कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष उठा सकती है।

कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने कर्नाटक को 12 अगस्त से 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने भी उक्त फैसले को बरकरार रखा।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने की। तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी. एस. वैद्यनाथन ने कहा कि राज्य को पानी का आनुपातिक हिस्सा नहीं मिला है। वैद्यनाथन ने पीठ से कहा, ‘‘हमें पानी का आनुपातिक हिस्सा मिलना चाहिए। दुर्भाग्य से, ऐसा नहीं हो रहा है।’’

उन्होंने जब दलील दी कि सीडब्ल्यूएमए कावेरी के पानी का आनुपातिक हिस्सा छोड़ने का निर्देश नहीं दे रहा है, तो पीठ ने कहा कि राज्य इस मुद्दे को प्राधिकरण के समक्ष उठा सकता है।

पीठ को बताया गया कि सीडब्ल्यूएमए की बैठक दिन में और 25 अगस्त को होनी है।

उच्चतम न्यायालय तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कर्नाटक सरकार को तत्काल पानी छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने वैद्यनाथन से कहा कि पिछली सुनवाई पर कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने पानी छोड़े जाने का ब्योरा देने वाला एक चार्ट उसके समक्ष रखा था। पीठ ने कहा कि चार्ट के अनुसार, तमिलनाडु के लिए पानी सीडब्ल्यूएमए के निर्देश के मुताबिक छोड़ा गया है।

वैद्यनाथन ने कहा, ‘‘सीडब्ल्यूएमए आनुपातिक पानी छोड़ने का निर्देश नहीं दे रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं (तमिलनाडु) किसानों के लिए पानी की एक बूंद भी नहीं छोड़ सकता। वे (कर्नाटक) किसानों के लिए पानी छोड़ रहे हैं।’’

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित करते हुए दोनों पक्षों से अद्यतन स्थिति के साथ आने को कहा।

गत 17 अगस्त को शीर्ष अदालत ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ने संबंधी सीडब्ल्यूएमए के निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा था।

वहीं तमिलनाडु सरकार ने अदालत के समक्ष दावा किया था कि सीडब्ल्यूएमए के निर्देश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है, जबकि कर्नाटक सरकार ने कहा था कि पेश की जा रही तस्वीर ‘‘बेहद गलत’’ है।

तमिलनाडु सरकार ने इससे पहले कहा था कि कम बारिश वाले वर्ष में राज्य को कावेरी जल का उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने तीन अगस्त को कर्नाटक सरकार को तत्काल पानी छोड़ने का निर्देश देने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया था कि सीडब्ल्यूआरसी द्वारा आवंटित तथा पड़ोसी राज्य कर्नाटक द्वारा छोड़े गए पानी की मात्रा काफी कम है।

गत 28 जुलाई को हुई सीडब्ल्यूआरसी की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, राज्य सरकार के अनुसार, 29 जुलाई से दो अगस्त के बीच बिलिगुंडलु में छोड़े गए पानी की मात्रा 158 से 550 क्यूसेक के बीच रही।

तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि तीन अगस्त तक कर्नाटक के केआरएस, काबिनी, हरंगी और हेमावती जलाशयों में संयुक्त भंडारण 77.537 टीएमसी (हजार मिलियन घन फुट) था और कर्नाटक को तमिलनाडु के उचित हिस्से का आनुपातिक रूप से पानी छोड़ने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

विज्ञप्ति में कहा गया कि कर्नाटक में हाल में केआरएस और काबिनी बांधों के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद बिलिगुंडलु में जारी होने वाला आनुपातिक पानी 26.954 टीएमसी होना चाहिए।

इसमें कहा गया, ‘‘इसके अनुसार, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा 4.536 टीएमसी पानी आवंटित करने का आदेश बहुत कम है।’’

भाषा अमित रंजन

रंजन