राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और सार्वजनिक उपक्रमों में ‘जन सेवा’ कार्यक्रम का विस्तार करेगा सीबीसी
राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और सार्वजनिक उपक्रमों में ‘जन सेवा’ कार्यक्रम का विस्तार करेगा सीबीसी
(अश्विनी श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) ने सरकारी अधिकारियों में अधिक सहानुभूति और लोक सेवा की मजबूत भावना विकसित करने के लिए अपने ‘जन सेवा’ कार्यक्रम का विस्तार राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) तक करने का फैसला किया है। आयोग की प्रमुख एस. राधा चौहान ने रविवार को यह जानकारी दी।
चौहान ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोक सेवकों के व्यवहार में बदलाव लाना है।
‘जन सेवा’ कार्यक्रम का मकसद लोक सेवकों में ‘सेवा भाव’ की गहरी भावना विकसित करना है। यह कार्यक्रम जवाबदेही, तत्परता और सेवा में उत्कृष्टता को बढ़ाने वाले मूल्यों को प्रोत्साहित करता है।
चौहान ने ‘पीटीआई-भाषा’ से एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘जब सेवा का बाहरी कार्य उद्देश्य, संतुष्टि और प्रेरणा की आंतरिक भावना से गहराई से जुड़ा होता है तो अनुभव बदल जाता है। यह तालमेल सहानुभूति पैदा करता है और सेवा को अधिक सार्थक बनाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके परिणामस्वरूप सेवा अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सही मायने में नागरिक-केंद्रित बनती है। यही इस कार्यक्रम का उद्देश्य है- नियमित सेवा को उद्देश्यपूर्ण कार्य से जोड़ना।’’
चौहान ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।
उन्होंने कहा, ‘‘अब हम इस कार्यक्रम का विस्तार सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कर रहे हैं।’’
चौहान ने कहा कि सीबीसी राज्यों के प्रशिक्षण संस्थानों में मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने में मदद करेगा, जो बाद में अपने-अपने राज्यों और अन्य संगठनों में यह कार्यक्रम चलाएंगे।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की पूर्व सचिव चौहान ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी नागरिकों के साथ अपने व्यवहार का स्वयं आकलन करते हैं और इस पर विचार करते हैं कि क्या वे अधिक प्रभावी या सहानुभूतिपूर्ण तरीके से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
सीबीसी प्रमुख ने कहा कि यह कवायद संवेदनशील और सक्रिय लोक सेवा के महत्व एवं इससे मिलने वाली संतुष्टि को मजबूत करती है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1988 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की सेवानिवृत्त अधिकारी चौहान ने कहा, ‘‘हमें अब विश्वास है कि हमें इस कार्यक्रम को राज्यों तक ले जाना चाहिए और इसे अग्रिम पंक्ति के कर्मियों से लेकर नीति-स्तर के निर्णय लेने वालों तक, सभी स्तरों के लोक अधिकारियों के लिए व्यापक बनाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बार का हस्तक्षेप नहीं है, बल्कि सीखने और बदलाव की सतत तथा क्रमिक यात्रा है।’’
क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) कर्मयोगी मिशन की रूपरेखा का अभिरक्षक है। इसकी शुरुआत सितंबर 2020 में की गई थी। मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य सिविल सेवा को भारतीय मूल्यों पर आधारित और भारत की प्राथमिकताओं के अनुरूप सहयोगपूर्ण कार्यशैली सम्मत प्रभावी और दक्ष लोक सेवा बनाना है।
भाषा
सिम्मी नेत्रपाल
नेत्रपाल

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