सीबीएफसी, सरकार को दिव्यांगजनों के लिए फिल्में सुलभ बनाने पर विचार करने का निर्देश
सीबीएफसी, सरकार को दिव्यांगजनों के लिए फिल्में सुलभ बनाने पर विचार करने का निर्देश
नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और फिल्म निर्माताओं से कहा है कि वे फिल्मों को दिव्यांगों के लिए सुलभ बनाने से जुड़ी चिंताओं पर विचार करें।
अदालत ने कहा कि संबंधित पक्षों को एक उपयुक्त और व्यावहारिक समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए और दो हफ्ते के अंदर इस संबंध में निर्णय लिया जाए।
उच्च न्यायालय ने यह आदेश वकील और दृष्टिबाधित व्यक्ति राहुल बजाज की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। वह एक वकील और दृष्टिबाधित व्यक्ति हैं, जिन्होंने सिनेमाघरों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों की सुलभता को लेकर चिंता जताई थी।
बजाज ने कहा है कि उपयुक्त सुविधाओं — खासकर ‘ऑडियो डिस्क्रिप्शन’ और उसी भाषा में ‘कैप्शन या सबटाइटल’ या भारतीय संकेत भाषा — के न होने की वजह से वे आम लोगों की तरह फिल्में नहीं देख पाते हैं।
याचिकाकर्ता का कहना था कि दिव्यांग लोगों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करने के कानूनी और नियामक नियमों के बावजूद, ‘‘पुष्पा 2: द रूल’’ जैसी फिल्में बिना इन सुविधाओं के दिखाई जा रही हैं। साथ ही, जहां ये सुविधाएं दी भी जाती हैं तो वहां वे बहुत कम सिनेमाघरों तक ही सीमित होती हैं।
उठाई गई शिकायतों की प्रकृति और उनके व्यापक असर को देखते हुए न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को यह उपयुक्त लगा कि सभी संबंधित पक्षों को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने और आपसी सहमति से कोई समाधान तलाशने का मौका दिया जाए।
अदालत ने 10 अगस्त को जारी एक आदेश में कहा, ‘‘इसके तहत, याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों समेत सभी संबंधित पक्षों की एक संयुक्त बैठक आज से एक हफ्ते के भीतर बुलाई जाए, ताकि याचिकाकर्ता द्वारा फिल्मों की सुलभता को लेकर उठाए गए व्यापक मुद्दों पर विचार किया जा सके।’’
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर के लिए निर्धारित कर दी और कहा कि बैठक के नतीजों से उस तारीख को अवगत कराया जाए।
याचिका में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय और सीबीएफसी से सिनेमाघरों में सहायक उपकरण और प्रौद्योगिकी की व्यवस्था करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
इसमें कहा गया है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत आवश्यक सुविधाओं के बिना ही फिल्में प्रदर्शित की जा रही हैं।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश

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