चंडीगढ़, 15 मई (भाषा) हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये के घोटाला मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पांच अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को मंजूरी दे दी है।
यह अनुमति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसीए) की धारा 17ए के तहत दी गई है। इस प्रावधान के अनुसार, किसी लोक सेवक के खिलाफ कथित अपराध की जांच या पूछताछ सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं की जा सकती।
सूत्रों ने बताया कि सीबीआई अब अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुला सकती है।
उन्होंने बताया कि सीबीआई ने आरोपियों के बयानों से हुए खुलासों के आधार पर उक्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी थी। जांच एजेंसी उन विभिन्न प्रशासनिक मंजूरियों की भी जांच कर सकती है, जिनके जरिए सरकारी धन निजी बैंकों में जमा कराया गया।
एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को कहा गया कि ‘आईडीएफसी फर्स्ट बैंक’ और ‘एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक’ के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के लोक सेवकों के साथ मिलीभगत कर फर्जी तरीके से सरकारी धन का गबन किया। अब तक इस मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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प्रचेता प्रशांत
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