सीबीआई विवाद, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- नियुक्ति के लिए अंतिम अथॉरिटी सरकार के पास

सीबीआई विवाद, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- नियुक्ति के लिए अंतिम अथॉरिटी सरकार के पास

सीबीआई विवाद, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- नियुक्ति के लिए अंतिम अथॉरिटी सरकार के पास
Modified Date: November 29, 2022 / 08:12 pm IST
Published Date: November 29, 2018 12:43 pm IST

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा की याचिका पर सुनवाई की। अदालत में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि डायरेक्टर की नियुक्ति के बाद चयन समिति की कोई भूमिका नहीं होती है। समिति का काम पद के लिए तीन लोगों का नाम देने के बाद खत्म हो जाता है। सरकार इसके बाद उन तीनों में से एक को डायरेक्टर नियुक्त करती है। उन्होंने काहा कि नियुक्ति की अंतिम अथॉरिटी सरकार ही है।

वहीं सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सीबीसी सीबीआई डायरेक्टर को नहीं हटा सकती। यह काम केंद्र सरकार ही कर सकती है। सीवीसी सिर्फ जांच की निगरानी के लिए है, उसे प्रशासनिक अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि आलोक वर्मा को निदेशक के अधिकार से वंचित करने के बाद किए गए सभी तबादलों का रिकार्ड रखा जाए। मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।

आलोक वर्मा की ओर से प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन ने कहा कि उनकी नियुक्ति एक फरवरी, 2017 को हुई थी और कानून के हिसाब दो साल का निश्चित कार्यकाल होगा और इसका तबादला तक नहीं किया जा सकता। जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे के वकील ने कहा, सीवीसी को सीबीआई डायरेक्टर को हटाने की सिफारिश करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सीवीसी के पास आलोक वर्मा को अवकाश पर भेजने की सिफारिश करने का आदेश देने का कोई आधार नहीं था।

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नरीमन ने सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति और पद से हटाने की सेवा-शर्तों और दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान कानून 1946 के संबंधित प्रावधानों का जिक किया। इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही नरीमन ने कहा कि न्यायालय किसी भी याचिका के विवरण के प्रकाशन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता क्योंकि संविधान का अनुच्छेद इस संबंध में सर्वोपरि है। उन्होंने इस संबंध में शीर्ष अदालत के 2012 के फैसले का भी हवाला दिया।


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