नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिव्यांग छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति निधि से कथित तौर पर 11.4 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी के मामले में ‘‘फर्जी’’ संस्थानों और छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सीबीआई ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर में अज्ञात लोकसेवकों और नोडल अधिकारियों के खिलाफ ‘अंब्रेला छात्रवृत्ति योजना’ से धन की हेराफेरी करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। यह योजना 2018 में दिव्यांग छात्रों के लिए मैट्रिक उपरांत छात्रवृत्ति सहित छह छात्रवृत्ति योजनाओं के विलय के बाद शुरू की गई थी।
इस योजना के तहत छात्रवृत्ति 11 और 12वीं कक्षा के छात्रों के साथ-साथ मैट्रिक के बाद डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों में नामांकित छात्रों को मुहैया कराई जाती है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी)/अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री और डिप्लोमा तथा स्नातकोत्तर डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त करने वाले छात्रों को भी इस छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है।
सीबीआई के मुताबिक, उसने पिछले साल केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के सचिव की शिकायत पर प्रारंभिक जांच शुरू की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 28 संस्थानों से जुड़े 926 छात्रों को 11.41 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया, जो या तो फर्जी थे या मंत्रालय की ओर से निरीक्षण के दौरान उनमें गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं।
सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इनमें से कई संस्थानों का या तो अस्तित्व ही नहीं है या फिर वे बंद हो चुके हैं जबकि वे अब भी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल से धनराशि प्राप्त करने के लिए दावा कर रहे थे।
एजेंसी ने जांच में पाया कि जम्मू कश्मीर में स्थित सत्यम कॉलेज ऑफ एजुकेशन 2017 से बंद है, फिर भी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर बनाए गए फर्जी यूजर आईडी का उपयोग करके इसके छात्रों के नाम पर दावे दायर किए गए थे।
सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि कई विद्यालयों की जानकारी के बिना उनके नाम पर लाभ प्राप्त किया जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, राजस्थान, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों के 11 संस्थानों ने बताया कि वे इस योजना से अनभिज्ञ थे और कथित लाभार्थियों को कभी उनके स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया गया था।
भाषा धीरज नेत्रपाल
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