इस्तीफा देने वाले संवैधानिक पदाधिकारियों को सेवानिवृत्ति लाभ न देने की याचिका पर केंद्र को नोटिस

इस्तीफा देने वाले संवैधानिक पदाधिकारियों को सेवानिवृत्ति लाभ न देने की याचिका पर केंद्र को नोटिस

इस्तीफा देने वाले संवैधानिक पदाधिकारियों को सेवानिवृत्ति लाभ न देने की याचिका पर केंद्र को नोटिस
Modified Date: September 3, 2026 / 05:01 pm IST
Published Date: September 3, 2026 5:01 pm IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय बृहस्पतिवार को उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया जिसमें यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि पद से हटाए जाने से बचने के लिए इस्तीफा देने वाले न्यायाधीश सहित किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी को सेवानिवृत्ति के बाद भत्ते और अन्य लाभ नहीं दिये जाने चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने प्रतीक वीरा की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया।

याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता का कहना है कि जो संवैधानिक पदाधिकारी… अपना इस्तीफा देते हैं — चाहे वे पद से हटाने की कार्रवाई या महाभियोग से बचने के लिए ऐसा करें — उन्हें इस्तीफे की स्थिति में उस संवैधानिक पद से जुड़े भत्ते और अन्य किसी भी सुविधा का हकदार नहीं होना चाहिए।’’

उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के इस्तीफे के बाद यह जनहित याचिका काफी मायने रखती है।

पिछले साल 14 मार्च को नयी दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर अधजले नोटों की गड्डियां मिलने के बाद न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय वापस भेज दिया गया था।

वर्मा के इस्तीफे के बाद लोकसभा द्वारा उन्हें हटाने की प्रक्रिया ‘‘निरर्थक’’ हो गई है।

याचिका में कहा गया है कि इस्तीफे के बाद भी, संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों को अपने पद से जुड़ी सुविधाएं और भत्ते मिलते रहते हैं।

याचिका में कहा गया है, ‘‘ऐसा करना संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है और सीधे तौर पर कानून के शासन के विपरीत है, जो भारत के संविधान का मूल ढांचा है। अगर संवैधानिक पद पर आसीन कोई व्यक्ति अपने निर्धारित संवैधानिक कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा देता है, तो उसे किसी भी तरह का भत्ता, सुविधा या सहूलियत नहीं मिलनी चाहिए।’’

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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