(फाइल फोटो के साथ)
जयपुर, दो सितंबर (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को केंद्र सरकार से सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करने और इसका खर्च केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच बराबर बांटने की मांग की।
गहलोत ने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में गरीब और जरूरतमंद बुजुर्गों, विधवाओं तथा दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा जरूरी है।
उन्होंने एक बयान में कहा, “केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिलकर तत्काल पेंशन बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करनी चाहिए।”
उन्होंने लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की और प्रस्ताव दिया कि पेंशन पर होने वाले खर्च का 50-50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र एवं राज्य सरकारें वहन करें।
गहलोत ने दावा किया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन में केंद्र सरकार का योगदान पिछले 12 वर्षों में नहीं बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं केंद्र में कांग्रेस सरकारों ने शुरू की थीं ।
गहलोत ने दावा किया, “हालांकि, पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने केंद्रीय पेंशन राशि में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की, जबकि इस दौरान महंगाई में काफी वृद्धि हुई है।”
उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समितियां भी कई मौकों पर मौजूदा केंद्रीय सहायता को अपर्याप्त बता चुकी हैं और पेंशन राशि बढ़ाने की सिफारिश कर चुकी हैं।
राजस्थान का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि उनकी कांग्रेस सरकार ने 2013 में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए 500 रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन शुरू की थी।
उन्होंने दावा किया कि इसके बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में पेंशन की राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की।
गहलोत ने कहा कि 2018 में कांग्रेस के सत्ता में लौटने के बाद पेंशन बढ़ाकर 750 रुपये प्रति माह की गई और वर्ष 2023 में इसे बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन में हर साल 15 प्रतिशत की वृद्धि का कानूनी प्रावधान भी किया था, ताकि भविष्य की सरकारें इसकी राशि को स्थिर न रख सकें।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन का वित्तीय बोझ राज्य सरकारों पर काफी अधिक पड़ता है और केंद्र के पास अधिक संसाधन होने के कारण उसे इसमें अधिक योगदान देने की बेहतर स्थिति में होना चाहिए।
गहलोत ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर अमीर उद्योगपतियों के पक्ष में काम करने और गरीब एवं कमजोर वर्गों की उपेक्षा करने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा को महत्वपूर्ण साधन माना जाना चाहिए तथा उनके प्रस्ताव पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाषा बाकोलिया राजकुमार
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