केंद्र बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री अपलोड किये जाने की रोकथाम के उपाय करे: न्यायालय

केंद्र बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री अपलोड किये जाने की रोकथाम के उपाय करे: न्यायालय

केंद्र बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री अपलोड किये जाने की रोकथाम के उपाय करे: न्यायालय
Modified Date: September 24, 2026 / 08:18 pm IST
Published Date: September 24, 2026 8:18 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के मुद्दे को ‘‘बेहद गंभीर’’ बताते हुए बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह इस तरह की चीजें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड किये जाने की रोकथाम के लिए उपाय करे।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सरकार से कहा कि वह ऐसे उपायों पर विचार करे, जिनसे इस तरह की सामग्री को अपलोड करने या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामने आने से रोका जा सके।

न्यायालय ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस’ की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह याचिका संगठन के संस्थापक भुवन रिभु ने दायर की थी। इसमें ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस एवं अन्य बनाम एस हरीश एवं अन्य’ मामले में 23 सितंबर 2024 को आए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने का अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि फैसला आये लगभग दो साल बीत चुके हैं, लेकिन शीर्ष अदालत के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है।

केंद्र ने कहा कि वह न्यायालय में एक हलफनामा और अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करेगा। सरकार ने पीठ को यह भी बताया कि एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा रही है।

न्यायालय ने 14 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कानून और न्याय मंत्रालय को अपना जवाब या रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

चूंकि कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई, इसलिए पीठ ने केंद्र को अपना जवाब रिकॉर्ड पर रखने का ‘‘एक आखिरी मौका’’ दिया है।

सरकार से यह बताने को कहा गया है कि वह क्या कदम उठाना चाहती है और 23 सितंबर 2024 के फैसले में दिए गए निर्देशों को किस तरह से लागू करने का इरादा रखती है।

अदालत ने उन एहतियात के बारे में भी जानकारी मांगी है जो यह सुनिश्चित करने के लिए बरते जा सकते हैं कि बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री ऑनलाइन सामने न आए।

मसौदा एसओपी को अगली सुनवाई से चार-पांच दिन पहले याचिकाकर्ता को सौंपा जाना है, ताकि याचिकाकर्ता उस पर अपनी राय जाहिर कर सके।

मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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