‘महामृत्युंजय मंत्र’ के जाप से रक्तचाप, हृदयगति संतुलित करने में मिल सकती है मदद: अध्ययन

‘महामृत्युंजय मंत्र’ के जाप से रक्तचाप, हृदयगति संतुलित करने में मिल सकती है मदद: अध्ययन

‘महामृत्युंजय मंत्र’ के जाप से रक्तचाप, हृदयगति संतुलित करने में मिल सकती है मदद: अध्ययन
Modified Date: July 9, 2026 / 05:19 pm IST
Published Date: July 9, 2026 5:19 pm IST

नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) पांच मिनट तक ‘शांति मंत्र’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करने के बाद थोड़ी देर आराम करने से हृदय गति, रक्तचाप और हृदय पर पड़ने वाले भार को कम करने में मदद मिल सकती है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) ने अपने एक अध्ययन में यह दावा किया है।

यह अध्ययन इस माह ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल एंड मेडिकल रिसर्च’ में प्रकाशित हुआ। इस अध्ययन में भाग लेने वालों में मंत्रोच्चार करते समय हृदय रक्त परिसंचरण गतिविधि कुछ समय के लिए बढ़ गयी तथा उसके उपरांत पांच मिनट के विश्राम के पश्चात वे अपने आप में बहुत हल्का महसूस करने लगे।

शोधकर्ताओं ने पाया कि शांति मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के बाद हृदयगति, रक्तचाप, ‘रेट प्रेशर प्रोडक्ट’ (आरपीपी) और डबल प्रोडक्ट (डीओपी) में काफी कमी आयी जो दिल पर काम के बोझ (कार्डियक वर्कलोड) को दिखाता है। आरपीपी दिल की ऑक्सीजन की ज़रूरत को बताता है ।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने वाले समूह में आराम करने के बाद सांस लेने की दर में भी काफी कमी देखी गई, जबकि ऑक्सीजन संतृप्तता, ‘पल्स प्रेशर’ या औसत रक्तचाप में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया।

शोधकर्ताओं का कहना है कि निष्कर्ष बताते हैं कि मंत्रों का जाप करने से ‘पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम’ (शरीर की ‘आराम और पाचन’ संबंधी प्रतिक्रिया) सक्रिय हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर के स्वायत्त तंत्र में बेहतर संतुलन आ सकता है और हृदय एवं रक्त संचार तंत्र को आराम देने में मदद मिल सकती है।

‘शांति मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के जाप का शारीरिक क्रियाओं पर तत्काल प्रभाव’ नामक यह अध्ययन एमडीएनआईवाई की सहायक प्रोफेसर (योग शिक्षा) डॉ. इंदु शर्मा, एमडीएनआईवाई के सहायक प्रोफेसर (मानव शरीर विज्ञान) डॉ. रामेश्वर पाल और एमडीएनआईवाई के पूर्व विद्यार्थियों– लैंसी और तन्वांगी ने मिलकर किया था।

शोधकर्ताओं ने योग के 30 स्वस्थ अंत:स्नातक और स्नातोकोत्तर विद्यार्थियों का आकलन किया, जिन्होंने पांच मिनट तक शांति मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया।

मंत्र जाप से पहले, जाप के दौरान और जाप के बाद पांच मिनट के आराम के समय में शारीरिक मापदंडों को मापा गया।

शर्मा ने कहा, ‘‘हमारे अध्ययन से पता चलता है कि शांति मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का कुछ मिनट तक जाप करने के बाद, खासकर जाप के बाद थोड़ी देर आराम करने पर, शरीर में बदलाव देखे जा सकते हैं।’’

उन्होंने बताया कि ये नतीजे योग पर आधारित कल्याण पद्धतियों में मंत्र जाप को शामिल करने का समर्थन करते हैं तथा अलग-अलग तरह के लोगों पर इसके लंबे समय तक रहने वाले असर की जांच के लिए और शोध की ज़रूरत बताते हैं।

पाल ने बताया कि मंत्रों के जाप के बाद हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, रेट प्रेशर प्रोडक्ट और डबल प्रोडक्ट में कमी, तुरंत आराम मिलने और दिल पर काम का बोझ कम होने का संकेत देती है।

हालांकि, शोधार्थियों ने चेतावनी दी कि इस अध्ययन में स्वस्थ युवा योग छात्र शामिल थे और इसमें सिर्फ़ मंत्रोच्चार के तुरंत होने वाले असर की जांच की गई। उन्होंने क्लिनिकल आधार पर मंत्रोच्चार की संभावित चिकित्सीय भूमिका का मूल्यांकन करने के लिए ज़्यादा विविध आबादी और लंबे समय तक चलने वाले अभ्यास के साथ और बड़े अध्ययन की सलाह दी।

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


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