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नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने भूटान की न्यायिक प्रणाली में तकनीक-आधारित सुधारों का बृहस्पतिवार को समर्थन किया और कहा कि न्याय तक पहुंच तकनीकी प्रगति के अधिकतम इस्तेमाल पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर करती है।
थिम्पू में भूटान के रॉयल विश्वविद्यालय में ‘21वीं सदी में न्याय तक पहुंच: प्रौद्योगिकी, विधिक सहायता और जन-केंद्रित अदालतें’ विषय पर भाषण देते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे को यह संदेश दिया है कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर, भूटान के विद्यार्थियों को ‘इंटर्नशिप’ के अवसर प्रदान करना चाहता है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमें याद रखना चाहिए कि प्रौद्योगिकी इस युग में केवल एक आधुनिक माध्यम है, और हमारा कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि 21वीं सदी के तकनीकी उपकरण भले ही उन्नत हों, फिर भी वे आम लोगों के लिए सरल और सुलभ बने रहें।’’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि लोगों को स्पष्ट रूप से यह समझना चाहिए कि न्याय केवल अदालतों की चारदीवारी तक सीमित कोई बंद चीज नहीं है, बल्कि न्याय ऐसा जीवंत सिद्धांत है जो समाज के हर हिस्से तक पहुंचना चाहिए।
भूटानी विद्यार्थियों को ‘इंटर्नशिप’ प्रदान करने के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘अदालत की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करना गुणवत्तापूर्ण कानूनी शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है।’’
उन्होंने कहा कि आगे की राह में यह जरूरी है कि न्यायपालिका उचित उद्देश्यों के प्रति दृढ़ संकल्पित रहे और नैतिक मानकों को बनाए रखे। उन्होंने कहा कि साथ ही, तकनीक का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि न्याय व्यवस्था में निष्पक्षता, पारदर्शिता और मानवीय गरिमा को मजबूत किया जा सके।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ‘‘यदि हम अपनी विरासत के प्रति सच्चे रहना चाहते हैं तो तकनीकी सुधार केवल मौजूदा व्यवस्था को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं होने चाहिए बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना को अधिक लोकतांत्रिक और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ ये बदलाव शुरू हुए जैसे कि अधिक अदालतों की स्थापना, अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति और रिकॉर्ड कक्षों की व्यवस्था।’’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि 21वीं सदी में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जब विश्व स्तर पर कानूनी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक न्याय व्यवस्था में काम करने के तरीके को बदल रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने तकनीक को सोच-समझकर अपनाया है, इसके फायदों का लाभ उठाते हुए हमने निष्पक्षता, उचित प्रक्रिया, पारदर्शिता, मानवीय गरिमा और जवाबदेही जैसे अपने मूल मूल्यों की रक्षा की है।’’
भाषा देवेंद्र नरेश
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