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नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्षों को ‘‘शीघ्र समाप्त’’ करने का बृहस्पतिवार को आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे का समाधान सैन्य टकराव के माध्यम से नहीं किया जा सकता।
मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ व्यापक वार्ता करने के बाद ये टिप्पणियां कीं।
दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध छठे दिन में प्रवेश कर गया, जिसमें दोनों पक्षों ने नए हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया।
स्टब ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का जोरदार समर्थन किया, और तर्क दिया कि वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए वैश्विक बहुपक्षीय प्रणाली में व्यापक सुधार के साथ-साथ यह “अत्यंत महत्वपूर्ण” है।
अपने मीडिया बयान में मोदी ने कहा कि डिजिटलीकरण और स्थिरता के क्षेत्र में भारत-फिनलैंड के संबंधों को एक रणनीतिक साझेदारी का रूप दिया जा रहा है जो एआई, 6जी दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा और क्वांटम कंप्यूटिंग सहित कई उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगा।
दोनों पक्षों ने रक्षा, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति व्यक्त की।
मोदी-स्टब वार्ता में पश्चिम एशिया का संकट प्रमुखता से उठाया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत और फिनलैंड, दोनों ही कानून के शासन, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। हम इस बात पर सहमत हैं कि किसी भी मुद्दे का समाधान केवल सैन्य संघर्ष से नहीं किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा,‘‘चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्षों के शीघ्र अंत और शांति की दिशा में किए जा रहे हर प्रयास का समर्थन करना जारी रखेंगे।’’
मोदी ने भारत-यूरोप संबंधों में आए सुधार का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “आज विश्व एक अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे वैश्विक माहौल में, दुनिया की दो सबसे बड़ी कूटनीतिक शक्तियां भारत और यूरोप अपने संबंधों के सुनहरे दौर में प्रवेश कर रही हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारा बढ़ता सहयोग वैश्विक स्थिरता, विकास और साझा समृद्धि को नयी मजबूती दे रहा है।”
फिनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और यूक्रेन के खिलाफ रूस के “आक्रामक युद्ध” पर विचार-विमर्श किया।
उन्होंने कहा, “हम इस बात पर सहमत हुए कि युद्ध समाप्त करना सभी के हित में है। स्थायी शांति केवल वही हो सकती है जो संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का सम्मान करती हो।”
अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता नयी दिल्ली और हेलसिंकी के बीच संबंधों को और गहरा करने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा, “यह समझौता भारत और फिनलैंड के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को और मजबूत करेगा। भारत और फिनलैंड डिजिटल प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और स्थिरता जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार हैं।”
प्रधानमंत्री ने फिनलैंड की दूरसंचार के क्षेत्र में दिग्गज कंपनी नोकिया के भारत में परिचालन पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “नोकिया के मोबाइल फोन और टेलीकॉम नेटवर्क ने करोड़ों भारतीयों को जोड़ा है। फिनलैंड के वास्तुकारों के सहयोग से हमने चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाया है। ”
मोदी ने कहा, “ऐसे महत्वपूर्ण उदाहरणों से प्रेरित होते हुए, राष्ट्रपति स्टुब की इस यात्रा में, हम भारत-फिनलैंड संबंधों को एक डिजिटलीकरण और सततता को रणनीतिक साझेदारी का रूप दे रहे हैं।”
मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष रक्षा, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी साझेदारी को और मजबूत करेंगे।
उन्होंने कहा, “भारत और फिनलैंड जैसे लोकतांत्रिक और जिम्मेदार देशों के बीच यह रणनीतिक साझेदारी पूरी दुनिया के लिए भरोसेमंद प्रौद्योगिकी और आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करने में योगदान देगी।”
उन्होंने कहा, “फिनलैंड नॉर्डिक क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है। हम फिनलैंड के साथ मिलकर आर्कटिक और ध्रुवीय शोध में भी सहयोग बढ़ा रहें हैं।”
भाषा
प्रशांत माधव
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