त्रि-भाषा नीति पर न्यायालय ने कहा : बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए दबाव, केंद्र समाधान की तलाश करे
त्रि-भाषा नीति पर न्यायालय ने कहा : बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए दबाव, केंद्र समाधान की तलाश करे
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि बच्चों पर किसी भी तरह का दबाव नहीं पड़ना चाहिए और नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नीति से उत्पन्न मुद्दों का समाधान तलाशने की आवश्यकता है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि नीति लागू करने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन याचिकाकर्ताओं की एकमात्र चिंता इसे लागू करने के तरीके को लेकर है।
पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘‘इनमें से कुछ समस्याओं पर आप दोबारा विचार कर सकते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसे कभी न कभी लागू करना ही होगा। इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन इसे किस तरह व्यवस्थित किया जाए, ताकि जो भी बाधाएं सामने आ रही हैं, उनका समाधान निकाला जा सके।’’
पीठ ने कहा कि भाषा विकल्पों के संबंध में पर्याप्त मानव संसाधन ढांचा तैयार करना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिस पर विचार किया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘यदि आपने कक्षा छह से इसकी शुरुआत करने का निर्णय लिया है तो इस वर्ष के कक्षा छह के विद्यार्थियों को कुछ राहत देने पर विचार किया जा सकता है। इसे अगले वर्ष से लागू किया जा सकता है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘यह तय करना होगा कि इसकी शुरुआत किस कक्षा से की जाए। यह कक्षा छह, चार या तीन हो सकती है। पाठ्यक्रम और दो से तीन भाषाओं के विकल्प की शुरुआत को ध्यान में रखते हुए इस पर निर्णय लिया जा सकता है।’’
न्यायालय ने कहा कि एक चिंता यह भी है कि अंग्रेजी को भारतीय भाषा माना जाए या विदेशी भाषा।
पीठ ने भाटी से कहा, ‘‘भारत सरकार के रूप में आपको यह भी देखना होगा कि सीबीएसई के अलावा अन्य बोर्डों में क्या हो रहा है।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि नीति को उचित तरीके से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वह अदालत के सुझावों पर निर्देश लेकर वापस आएंगी।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम नहीं चाहते कि बच्चे किसी तरह के दबाव में आएं।’’
शीर्ष अदालत सीबीएसई की उस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक जुलाई से कक्षा नौ के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं के अध्ययन को अनिवार्य किया गया है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं।
सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने पीठ को बताया कि मामला तीन भाषाओं से संबंधित है और उनकी चिंता कक्षा छह को लेकर है।
उन्होंने कहा कि कक्षा छह से आठ के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने का अधिकार सीबीएसई के पास नहीं है, बल्कि यह काम राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को करना है।
सीजेआई ने कहा कि किसी भी भाषा को सीखना एक बड़ी उपलब्धि और अमूल्य संपत्ति है।
ग्रोवर ने कहा कि इसके लिए योग्य शिक्षकों की व्यवस्था होनी चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘यदि वे कोई भाषा शुरू कर रहे हैं तो उनके पास शिक्षकों की व्यवस्था की योजना भी होनी चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि स्कूल इस मामले में गलती करते हैं तो उन्हें जवाबदेह बनाया जाएगा।
पीठ ने कहा कि सीबीएसई ने 23 भाषाओं के विकल्प दिए हैं।
उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘हमें क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर किसी हीन भावना की सोच नहीं रखनी चाहिए। हमें इन सभी भाषाओं का उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना किसी अन्य भाषा का करते हैं।’’
पीठ ने कहा कि जब भी कोई नयी व्यवस्था लागू की जाती है तो कुछ आशंकाएं होना स्वाभाविक है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह स्वयं विशेषज्ञ समिति गठित कर सकती है या सरकार से विशेषज्ञ समिति गठित करने को कह सकती है, ताकि आने वाली कठिनाइयों पर सुझाव दिए जा सकें और समाधान निकाला जा सके।
ऐश्वर्या भाटी ने कहा, ‘‘ हम बच्चों को हर संभव बेहतर तरीके से सहयोग देना चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में हजारों विशेषज्ञों से सलाह ली गई है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सीबीएसई देश के कई बोर्डों में से एक है। देश में करीब 7.5 लाख स्कूल हैं, जिनमें लगभग 33 हजार सीबीएसई से संबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 4.45 प्रतिशत स्कूल सीबीएसई से जुड़े हैं और 99.19 प्रतिशत स्कूल पहले से ही दो भारतीय भाषाओं के नियम का पालन कर रहे हैं।
शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद निर्धारित की।
इससे पहले 27 मई को उच्चतम न्यायालय ने इस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
सीबीएसई की ओर से 15 मई को जारी परिपत्र के अनुसार, एक जुलाई 2026 से कक्षा नौ के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं (आर1, आर2, आर3) का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी।
यह कदम सीबीएसई की अध्ययन योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-स्कूली शिक्षा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप बनाने के तहत उठाया गया है।
परिपत्र के अनुसार, विदेशी भाषा चुनने वाले विद्यार्थी उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी ले सकेंगे, जब वे पहले दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर चुके हों। इसके अलावा विदेशी भाषा को चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में भी लिया जा सकता है।
सीबीएसई ने कहा है कि विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव कम करने और सीखने की प्रक्रिया पर ध्यान बनाए रखने के लिए कक्षा 10 में तीसरी भाषा (आर3) की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश
अविनाश

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