सीआईसी ने सुकेश चंद्रशेखर मामले में रोहिणी जेल के पूर्व अधीक्षक को आंशिक राहत दी

सीआईसी ने सुकेश चंद्रशेखर मामले में रोहिणी जेल के पूर्व अधीक्षक को आंशिक राहत दी

सीआईसी ने सुकेश चंद्रशेखर मामले में रोहिणी जेल के पूर्व अधीक्षक को आंशिक राहत दी
Modified Date: July 12, 2026 / 06:43 pm IST
Published Date: July 12, 2026 6:43 pm IST

(मोहित सैनी)

नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने रोहिणी जेल के पूर्व अधीक्षक सुनील कुमार को आंशिक राहत प्रदान की है। कुमार का दावा है कि उन्हें कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े एक आपराधिक मामले में फंसाया गया था।

सीआईसी ने दिल्ली जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि वे उन चुनिंदा रिकॉर्ड का खुलासा करें, जिन्हें कुमार ने अपना बचाव करने के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत मांगा था।

यह मामला चंद्रशेखर के जेल में रहने के दौरान हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।

कुमार उन जेल अधिकारियों में शामिल हैं, जिन पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने चंद्रशेखर से जुड़े कथित 200 करोड़ रुपये की रंगदारी के मामले में आरोप लगाए हैं। कुमार ने वर्ष 2020 से 2021 के बीच रोहिणी जेल में चंद्रशेखर के रहने से जुड़े जेल संबंधी रिकॉर्ड की मांग करते हुए 10 आरटीआई आवेदन दाखिल किए थे।

मांगी गई जानकारी में जेल में आने-जाने के रजिस्टर, दौरा करने वाले न्यायाधीशों की निरीक्षण रिपोर्ट, रहने की व्यवस्था के रिकॉर्ड, सीसीटीवी लगाए जाने और निगरानी के रिकॉर्ड, खाली बैरकों का विवरण, तलाशी रिपोर्ट और चंद्रशेखर के जेल में स्थानांतरित किए जाने और उसके रहने से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि जेल के नियमों का उल्लंघन करते हुए चंद्रशेखर को रोहिणी जेल में एक खास बैरक दिया गया था, उसे मोबाइल फोन और दूसरी प्रतिबंधित चीजों का बेरोकटोक इस्तेमाल करने की सुविधा थी, और वह उन जेल अधिकारियों की मिलीभगत से जेल के अंदर से ही जबरन वसूली का रैकेट चला रहा था, जिन पर रिश्वत लेने का आरोप है।

यह भी आरोप लगाया गया कि जेल अधीक्षक के कमरे में मोटे पर्दे लगाए गए थे, ताकि चंद्रशेखर की गतिविधियों को सीसीटीवी कैमरों से छिपाया जा सके और उसके बैरक के आसपास जेल कर्मचारियों को खास तौर पर तैनात किया गया था, ताकि उसे अपनी गतिविधियों के संचालन में मदद मिल सके।

आयोग के सामने सुनवाई के दौरान, कुमार ने कहा कि जेल अधीक्षक के तौर पर काम करते हुए जेल के नियमों के उल्लंघन के आरोप में उन्हें आपराधिक कार्यवाही में फंसाया गया है और मांगे गए रिकॉर्ड उनके बचाव के लिए जरूरी हैं।

सूचना आयुक्त आनंदी रामलिंगम ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कुमार को जेल में उनके आने-जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं, लेकिन इसमें से तीसरे पक्ष की निजी जानकारी और सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हटा दें।

सीआईसी ने यह भी आदेश दिया कि जेल अधिकारियों ने 2020 में लगाए गए नए सीसीटीवी कैमरों को अपने नियंत्रण में किस तारीख को लिया था, इसकी जानकारी दी जाए। आयोग ने माना कि संबंधित अधिकारी इस जानकारी को न देने का संतोषजनक कारण नहीं बता पाए।

आयोग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे उस समय के दौरान खाली बैरकों की कुल संख्या के बारे में कुमार के अनुरोध पर संशोधित जवाब दें। आयोग ने पाया कि सीपीआईओ ने जानकारी देने से इनकार करते समय आरटीआई कानून की धारा आठ के तहत किसी खास छूट का हवाला नहीं दिया था। आयोग ने कहा कि अगर कोई छूट लागू नहीं होती है, तो जानकारी दी जानी चाहिए।

सीसीटीवी निगरानी रिकॉर्ड से जुड़ी एक और अपील में, सीआईसी ने प्रतिवादी को निर्देश दिया कि वह ‘प्रथम अपीलीय प्राधिकरण’ के पूर्व के निर्देशों के अनुसार संशोधित जवाब जारी करे और यह बताए कि लगभग एक साल बीत जाने के बावजूद उन निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया।

हालांकि, आयोग ने कुमार की बाकी अपीलें खारिज कर दीं। आयोग का मानना ​​था कि जेल अधिकारियों ने जेल की सुरक्षा और तीसरे पक्ष की जानकारी से जुड़े मामलों में आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जी) और 8(1)(जे) के तहत छूट का सही इस्तेमाल किया था।

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में