महिलाओं पर जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव, इससे निपटने के लिए दिया जा रहा वित्त नाकाफी: संरा

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महिलाओं पर जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव, इससे निपटने के लिए दिया जा रहा वित्त नाकाफी: संरा

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  • Publish Date - March 8, 2026 / 11:19 AM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 11:19 AM IST

(अपर्णा बोस)

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) ‘यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल कॉम्पैक्ट नेटवर्क इंडिया’ (यूएनजीसीएनआई) की एक शीर्ष प्रतिनिधि ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन का महिलाओं पर गंभीर असर होता है, लेकिन इस प्रभाव से प्रभावित महिलाओं की मदद के लिए जो धन दिया जा रहा है, वह आवश्यकता की तुलना में काफी कम है।

यूएनजीसीएनआई की अध्यक्ष वैशाली निगम सिन्हा ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में जलवायु से संबंधित आपदा प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानने की आवश्यकता पर जोर दिया और उनके जीवन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए होने वाले खर्च पर बात की।

सिन्हा ने कहा, ‘जलवायु संबंधित आपदाओं के दौरान महिलाओं के अधिक प्रभावित होने की संभावना होती हैं। जब हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करते हैं, तो महिलाओं की सुरक्षा और समर्थन महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, जब हम यह देखते हैं कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावित महिलाओं की मदद के लिए कितना धन दिया जा रहा है, तो वह आवश्यकता के मुकाबले केवल एक छोटा सा हिस्सा होता है – लगभग 10 प्रतिशत।’

साल 2025 में, महिलाओँ से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि 2050 तक जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में 15.83 करोड़ और महिलाएं एवं लड़कियां अत्यधिक गरीबी की तरफ जा सकती हैं, जोकि बहुत बुरी स्थिति होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति को उजागर करते हुए, उन्होंने बताया कि कृषि या इसी तरह के क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को अक्सर न तो पहचान मिलती है और न ही उन्हें वेतन मिलता है, फिर भी वे अत्यधिक गर्मी से सीधे प्रभावित होती हैं, विशेष रूप से राजस्थान और गुजरात जैसे क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य, आजीविका और जीवन के कई अन्य पहलुओं पर असर पड़ता है।

भाषा जोहेब सिम्मी

सिम्मी