मुख्यमंत्री माझी ने सीएमओ से न्यायिक समिति की रिपोर्ट ‘गायब’ होने के आरोपों की जांच का संकेत दिया

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मुख्यमंत्री माझी ने सीएमओ से न्यायिक समिति की रिपोर्ट ‘गायब’ होने के आरोपों की जांच का संकेत दिया

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  • Publish Date - June 7, 2026 / 10:54 PM IST,
    Updated On - June 7, 2026 / 10:54 PM IST

भुवनेश्वर, सात जून (भाषा) ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार को संकेत दिया कि पिछली बीजद सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से दो न्यायिक आयोगों की रिपोर्ट ‘‘गायब’’ होने के आरोपों की जांच का आदेश दिया जा सकता है।

खुर्दा जिले में एक कार्यक्रम से इतर मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर इस तरह के आरोप पाए जाते हैं, तो सरकार जांच करेगी।’’

इस मुद्दे ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है, जिसमें सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) रिपोर्ट के कथित रूप से गायब होने को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने दावा किया कि पिछली बीजद सरकार के कार्यकाल के दौरान सीएमओ से दो महत्वपूर्ण न्यायिक आयोगों की रिपोर्ट ‘‘चोरी’’ कर ली गई थीं।

हरिचंदन ने कहा था, ‘‘पिछली बीजद सरकार के दौरान अलग-अलग आयोगों की दो सबसे महत्वपूर्ण रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय से चोरी हो गईं। हम इस संबंध में बहुत जल्द निर्णय लेने वाले हैं।’’

बीजू जनता दल (बीजद) के विधायक और पूर्व कानून मंत्री अरुण कुमार साहू ने आरोपों पर सवाल उठाते हुए सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि किस आयोग की रिपोर्ट कथित तौर पर गायब हुई है।

साहू ने प्रेसवार्ता में पूछा, ‘‘क्या फाइलें मुख्यमंत्री कार्यालय से गायब हुईं, या मौजूदा सरकार ने जानबूझकर उन्हें गायब करवाया?’’

साहू ने कहा कि सीएमओ से फाइल का गायब होना जनता के भरोसे से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है और उन्होंने मांग की कि सरकार तथ्यों का खुलासा करे और जवाबदेही तय करे।

सूत्रों के अनुसार, जिन रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, उनमें से एक पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की गुम हुई चाबियों की न्यायिक जांच से संबंधित है। 324 पृष्ठों की यह रिपोर्ट नवंबर 2018 में प्रस्तुत की गई थी, लेकिन विधानसभा में पेश नहीं की गई है।

एक अन्य लंबित रिपोर्ट विश्व हिंदू परिषद के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की 2008 में हुई हत्या की न्यायिक जांच से संबंधित है, जिसके बाद कंधमाल और राज्य के अन्य हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी।

भाषा शफीक संतोष

संतोष