छत्रपति संभाजीनगर, सात जून (भाषा) ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने रविवार को कहा कि परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जिम्मेदारी है और मांग स्वीकार किए जाने तक आंदोलन नहीं रुकेगा।
दीपके ने दिल्ली में प्रदर्शन का नेतृत्व करने के एक दिन बाद छत्रपति संभाजीनगर में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में देश की राजनीति हिंदू-मुस्लिम एजेंडे के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया और बेरोजगारी को एक गंभीर मुद्दा बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह आंदोलन यहीं खत्म नहीं होगा क्योंकि देश में रोजगार भी एक बड़ा मुद्दा है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हम शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए एजेंडा तैयार करेंगे।’’
दीपके रविवार सुबह छत्रपति संभाजीनगर जिले के महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) वालुज क्षेत्र स्थित अपने घर पहुंचे, जहां उनके परिवार के सदस्यों ने उनका स्वागत किया।
उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में दोहराया कि कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने तक नहीं रुकेगा।
राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र कथित रूप से लीक होने और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) व्यवस्था में खामियों को लेकर प्रधान राजनीतिक हंगामे के केंद्र में हैं।
यह पूछे जाने पर कि वह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के बारे में क्यों नहीं बोले, दीपके ने कहा, ‘‘अगर (परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों) के लिए जवाबदेही तय नहीं हो रही है तो धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जिम्मेदारी है।’’
दीपके ने सवाल किया कि अगर मोदी रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रुकवा सकते हैं तो क्या प्रश्नपत्र लीक नहीं रोक सकते।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन ने दिखा दिया कि ‘जेन जेड’ भयभीत नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं को गलत चीजों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने जंतर-मंतर पर जो विरोध प्रदर्शन किया वह सफल रहा और इसमें 6,000 से 7,000 लोग शामिल हुए। यह आंदोलन राष्ट्रव्यापी होगा। जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते, हम पीछे नहीं हटेंगे।’’
इस बीच, दीपके के आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
एमआईडीसी वालुज थाने के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने आज से उनके आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी है। पहले वहां 11 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, अब इनकी संख्या बढ़ाकर 15 कर दी गई है। तैनात किए गए कर्मचारी स्थानीय थाने और नगर पुलिस मुख्यालय से हैं।’’
दीपके ने कहा कि प्रधान के पद छोड़ने के बाद शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए एजेंडा तैयार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने की जिम्मेदारी किसी को तो लेनी चाहिए, जिससे बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने पूछा, ‘‘अगर कोई जिम्मेदारी ही नहीं ले रहा है, तो व्यवस्था प्रभावी तरीके से कैसे काम करेगी?’’
दीपके ने दावा किया कि देश का युवा ‘‘बर्बाद’’ हो रहा है, क्योंकि न तो उसे रोजगार मिल रहा है और न ही उसकी परीक्षाएं सही तरीके से आयोजित कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सवाल नहीं पूछे जाते इसलिए प्रश्नपत्र लीक होते रहते हैं।’’
दीपके ने जोर देकर कहा कि सीजेपी पूरी तरह ‘जेन जेड’ के लिए है और इसका किसी भी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं से बात नहीं की है। यह आंदोलन ‘जेन जेड’ के लिए है। जो लोग हमारा समर्थन करना चाहते हैं, वे बाहर से समर्थन कर सकते हैं लेकिन हम खुद को किसी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ेंगे।’’
उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल हुए प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि को लेकर की गई टिप्पणियों की भी आलोचना की।
उन्होंने किसी का नाम लिये बिना कहा, ‘‘जंतर-मंतर पर भारी भीड़ और तस्वीरें लोगों के बारे में खुद बयां करती हैं। वे कितने लोगों को पाकिस्तानी कहेंगे? क्या वे आंदोलनकारी छात्रों, विपक्ष और सवाल पूछने वाले मीडिया को पाकिस्तानी कहेंगे?’’
उन्होंने कहा, ‘‘क्या केवल (सत्तारूढ़ दलों के) आईटी प्रकोष्ठ के लोग भारतीय हैं?’’
दीपके ने कहा कि ‘तिलचट्टा’ (कॉकरोच) शब्द के विरोध में एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में शुरू हुए सीजेपी आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों में हुए आंदोलनों से नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि यहां (भारत में) एक व्यवस्था है। जो लोग हमारे आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों में हुए आंदोलनों से करते हैं, उन्हें यह जानना चाहिए कि जंतर-मंतर आंदोलन बहुत शांतिपूर्ण था। आंदोलन में शामिल युवा देश के कोने-कोने से आए थे।’’
दीपके ने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से बड़े स्तर पर किए जाएंगे।
दीपके ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी उनके कथित आलोचनात्मक बयान को लेकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, ‘‘फडणवीस को बोलने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि वे महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के मुख्यमंत्री हैं, उत्तर प्रदेश के नहीं। मेरे पास डॉ. आंबेडकर की तस्वीर वाली एक किताब है। क्या सत्ताधारी दल के नेता (फडणवीस) का मतलब यह था कि आंबेडकर की तस्वीर दिखाना अराजकता है? क्या ‘जय भीम’ का नारा लगाना उनके अनुसार अराजकता है?’’’
सीजेपी के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारी शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और परीक्षाओं तथा भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुए प्रदर्शन में दीपके के साथ जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की एनी राजा और वामपंथी छात्र एवं युवा संगठनों के कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
भाषा
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