नौसेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं और तटरक्षक बल को मिलाकर एक विशेष नौसैन्य थिएटर कमान की वकालत की

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नौसेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं और तटरक्षक बल को मिलाकर एक विशेष नौसैन्य थिएटर कमान की वकालत की

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  • Publish Date - May 30, 2026 / 07:13 PM IST,
    Updated On - May 30, 2026 / 07:13 PM IST

नयी दिल्ली, 30 मई (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने शनिवार को तीनों सेनाओं और तटरक्षक बल की क्षमताओं को मिलाकर एक विशेष नौसैनिक थिएटर कमान बनाने की जोरदार वकालत की और पश्चिम एशिया संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा सीधे ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है।

एडमिरल त्रिपाठी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘सेना के तीनों अंगों को एक साथ जोड़ने (थिएटराइजेशन) का मकसद सिर्फ संगठन के ढांचे को बदलना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका असली उद्देश्य युद्ध लड़ने की हमारी क्षमता को और बेहतर बनाना तथा देश की सैन्य शक्ति को असल मायने में मजबूत करना होना चाहिए।’’

नौसेना प्रमुख ने कहा कि सेना के तीनों अंगों का तालमेल (संयुक्तता) सिर्फ एक अवधारणा नहीं, बल्कि युद्ध जीतने की एक अनिवार्य जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि जो भी नया ढांचा तैयार किया जाए, उसमें समुद्री चुनौतियों और हकीकतों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए, साथ ही वह देश के साझा युद्ध कौशल के बड़े लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाना चाहिए।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को देखते हुए, थलसेना, नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल की परिसंपत्तियों तथा कर्मियों को मिलाकर एक विशिष्ट नौसैनिक थिएटर कमान बनाने की बात पर ध्यान दिया जा रहा है। इस व्यापक रूपरेखा में उत्तरी तथा पश्चिमी मोर्चों के प्रबंधन के लिए दो और थिएटर कमान बनाने की बात कही गई है।

एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और रूस-यूक्रेन संघर्ष ‘‘साफ याद दिलाते हैं’’ कि सुरक्षा का विषय आपस में जुड़ा हुआ है, और संघर्ष से दूरी का मतलब उसके नतीजों से दूरी नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘पहला और सबसे जरूरी सबक यह है कि समुद्री सुरक्षा सीधे आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय लचीलेपन से जुड़ी है।’’

नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘जहाजरानी मार्गों, ऊर्जा प्रवाह और समुद्री साजो-सामान की कड़ियों में रुकावट के तत्काल रणनीतिक और आर्थिक नतीजे होते हैं, जिससे बीमा की लागत, जहाजरानी पैटर्न और पूरे इलाकों में रणनीतिक संतुलन पर असर पड़ता है।’’

उन्होंने कहा कि युद्ध का तरीका ही बहुत बड़े बदलाव से गुजर रहा है और आज समुद्री युद्धक्षेत्र समुद्र तल से लेकर अंतरिक्ष तक आसानी से फैला हुआ है, जबकि साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक, सूचना और ज्ञानात्मक क्षेत्र भी उतने ही ज़रूरी हो गए हैं।

त्रिपाठी ने हाल के संघर्षों का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि छोटी और तेज लड़ाइयों का मिथक गलत साबित हो गया है और लंबी दूरी के सटीक हथियारों तथा लगातार निगरानी के जमाने में रणनीतिक गहराई अब किसी ठिकाने की गारंटी नहीं देती।

नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘इसके अलावा देशों के बीच व्यापारिक करों (टैरिफ) को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और सामान पहुंचाने वाली आपस में जुड़ी कड़ियों में रुकावटें आ रही हैं। इस वजह से अब देशों को अपनी रणनीति बदलनी होगी-उन्हें अब सिर्फ ‘समय पर काम चलाने’ वाली तत्परता के बजाय, ‘मुसीबत के लिए तैयार रहने’ वाले जुझारूपन पर ध्यान देना होगा।’’

भाषा वैभव नेत्रपाल

नेत्रपाल