कोचिंग सुधार: कक्षा 11 के स्तर पर प्रवेश परीक्षाएं कराने की संभावना तलाश रहा केंद्र

कोचिंग सुधार: कक्षा 11 के स्तर पर प्रवेश परीक्षाएं कराने की संभावना तलाश रहा केंद्र

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  • Publish Date - January 13, 2026 / 07:48 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 07:48 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा प्रवेश परीक्षाओं में सुधार और कोचिंग केंद्रों पर निर्भरता कम करने के लिए गठित एक समिति कक्षा 11 में महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने या कक्षा की परीक्षाओं को उनके (प्रवेश परीक्षाओं के) कठिनाई के स्तर के अनुरूप बनाने की संभावना तलाश रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

समिति यह अध्ययन करने के लिए आंकड़ों का विश्लेषण कर रही है कि प्रवेश परीक्षाओं का कठिनाई का स्तर कक्षा 12 के पाठ्यक्रम की कठिनाई के स्तर के अनुरूप है या नहीं, जबकि वर्तमान में अधिकतर प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 12 के पाठ्यक्रम पर आधारित होती हैं।

पिछले वर्ष शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग केंद्रों से जुड़े मुद्दों, ‘डमी स्कूलों’ के पनपने तथा प्रवेश परीक्षाओं की प्रभावशीलता और निष्पक्षता की समीक्षा के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया था।

उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी की अध्यक्षता वाली यह समिति उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए कोचिंग केंद्रों पर छात्रों की निर्भरता कम करने के उपाय सुझाएगी।

सूत्रों के अनुसार, ‘‘समिति की हालिया बैठक में हितधारकों ने सुझाव दिया कि कुछ प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 11 के स्तर पर कराई जा सकती हैं या कम से कम कक्षा 11 की परीक्षाएं प्रवेश परीक्षाओं के समान बहुविकल्पीय प्रश्न (एमसीक्यू) प्रारूप में आयोजित की जाएं। इस संभावना का अध्ययन किया जा रहा है।’’

सूत्रों ने बताया, ‘‘समिति मौजूदा स्कूली शिक्षा प्रणाली में व्याप्त उन कमियों की भी समीक्षा कर रही है, जिनके कारण छात्र कोचिंग केंद्रों पर निर्भर हो जाते हैं। इनमें विश्लेषणात्मक सोच, तार्किक विवेचन, विश्लेषणात्मक कौशल और नवाचार पर सीमित ध्यान तथा रटंत पद्धति का प्रचलन प्रमुख हैं।’’

कोचिंग के घंटे सीमित करना, स्कूल पाठ्यक्रम को इस तरह पुनः डिज़ाइन करना कि वह स्कूल के बाद होने वाली प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के अनुरूप हो, और बोर्ड परीक्षा के परिणामों को अधिक महत्व देना भी समिति को प्राप्त हुए सुझावों में शामिल हैं।

समिति के अन्य कार्यक्षेत्रों में छात्रों और माता-पिता में विभिन्न करियर मार्गों के प्रति जागरूकता के स्तर का मूल्यांकन करना और इस जागरूकता की कमी के कारण कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठित संस्थानों पर अत्यधिक निर्भरता का प्रभाव, स्कूलों और कॉलेजों में करियर काउंसलिंग सेवाओं की उपलब्धता और प्रभावशीलता का आकलन करना, तथा करियर मार्गदर्शन ढांचों को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाना भी शामिल है।

समिति के सदस्यों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष, विद्यालय शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों के संयुक्त सचिव, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) त्रिची, आईआईटी कानपुर और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के प्रतिनिधि तथा स्कूलों के प्रधानाचार्य (एक-एक केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और निजी विद्यालय से) शामिल हैं।

देश में कोचिंग संस्थान हाल के वर्षों में कई विवादों के केंद्र में रहे हैं। यह कदम सरकार को छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों, आग लगने की घटनाओं, कोचिंग संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और वहां अपनाई जा रही शिक्षण पद्धतियों को लेकर मिली शिकायतों के बाद उठाया गया है।

भाषा खारी पवनेश

पवनेश