कोयला घोटाला: अदालत ने पूर्व सांसद विजय दर्डा और अन्य के खिलाफ ईडी के मामले को खारिज किया

कोयला घोटाला: अदालत ने पूर्व सांसद विजय दर्डा और अन्य के खिलाफ ईडी के मामले को खारिज किया

कोयला घोटाला: अदालत ने पूर्व सांसद विजय दर्डा और अन्य के खिलाफ ईडी के मामले को खारिज किया
Modified Date: July 13, 2026 / 06:43 pm IST
Published Date: July 13, 2026 6:43 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने महाराष्ट्र के बांदर कोल खदान आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन के मामलों में पूर्व सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र दर्डा और अन्य के खिलाफ दर्ज शिकायत सोमवार को खारिज कर दी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) मामलों की विशेष अदालत ने 27 मार्च को पूर्व सांसद दर्डा और अन्य लोगों को बरी कर दिया था। अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया था कि कोयला खदान का आवंटन एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति और प्रधानमंत्री कार्यालय के ‘नीतिगत निर्णय’ का हिस्सा था।

कोयला खदान आवंटन में कथित अनियमितता को लेकर 27 मार्च 2014 को दर्ज और सबसे पुराने लंबित मामले का निस्तारण करते हुए विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने मैसर्स एएमआर आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड, मनोज कुमार जायसवाल और अन्य लोगों को भी बरी कर दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘मुख्य अपराधों की सुनवाई में बरी होने के कारण, धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा-4 के तहत दंडनीय, धारा 3 (धनशोधन का अपराध) के साथ धारा 70 (कंपनियों द्वारा अपराध) के तहत मौजूदा कार्यवाही का आधार ही खत्म हो गया है। इसके मद्देनजर मौजूदा कार्यवाही बंद की जाती है और शिकायत को खारिज किया जाता है।’’

अदालत ने कहा कि भले ही धनशोधन का अपराध मूल अपराध से स्वतंत्र और अलग है, लेकिन इस अपराध का अस्तित्व उक्त मूल अपराध और उससे कमाई के होने पर ही निर्भर करता है।

इसमें कहा गया, ‘‘एक बार जब आरोपी को तय अपराध के मामले में बरी कर दिया जाता है, तो अपराध से हुई किसी भी कमाई के अस्तित्व का सवाल ही नहीं उठता।’’

भाषा धीरज वैभव

वैभव


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